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Thursday, October 20, 2011

Shubh dipawali शुभ दीपावली

शुभ दीपावली 


घर में लक्ष्मि जी कि पूजा हो रही है
और हम सब आरती गा रहे है 

चारो तरफ रोशनी जगमगा रही है      
रंग - बिरंगे दियो कि लौ आ रही है 



सुंदर -सुंदर रंगोली आंगन सजा रही है 
मिठाई कि खुशबू मन ललचा रही है 






पटाखे और फुलझडीयो के सुंदर चित्र   
सबकी आंखे चमका रहीं हैं

फुलों कि भिनी - भिनी सुगंध 
घर - आंगन को महका रही हैं 

नए - नए वस्त्रो मे, नए - नए श्रींगार मे 
शुभ दीपावली कहते हुए लोगो कि टोलीया जा रही हैं .



आप सभी को मेरी ओर से दीपावली कि हार्दिक शुभकामनाए ...
दीपावली का यह पावन उत्सव आप सभी के जीवन मे ढेरो खुशिया लेकर आए....





Monday, October 17, 2011

Mai hun tujhame kahin naa kahi मैं हूँ तुझमे कहीं-न -कहीं


मैं तेरे मन में हूँ पर जुबान पर नहीं
मैं तेरी बातो में हूँ  , तेरे शब्दो में हूँ 
 पर मैं हूँ तुझमे कहीं-न -कहीं




तू मेरे दिल में है. मेरी बातो मे है 
मेरी रूह में है , मेरे जजबातो में है 
तू मुझमे समाई है इस कदर ,
बस तू हि तू है मैं कहीं नहीं......


Thursday, October 13, 2011

Diya Aur Bati दिया और बाती



एक दुजे बिन अधुरे हैं हम 
मै नहि तो वो रोशन हि नहि 
वो नहि तो मेरा अस्तित्व हैं कम
वो मेरी संगिनी हैं ,
वो मेरी साथी
मै दिया हु तो वो बाती...
दिया और बाती.....

Sunday, October 9, 2011

Intjar इंतजार



कब आएगा वो सुरज 
जो जीवन में उजाला लाए

कब आएगा वो दिन
 जो मेरे हर पल को चमकाये

कब आएगी वो संध्या 
जो मन शीतल कर जाए

कब आएगी वो तारो से सजी रात 
जो मेरे जीवन को भी सजाये 

कब आएगी वो घडी 
जो जीवन में रफ्तार लाए 

कब आएगी वो सडक
जो मुझे मंजिल तक पहूचाये
         
  इंतजार है मुझे हर उस मौके का 
  इंतजार है मुझे हर उस लम्हे का                                  
  इंतजार है मुझे उस हर एक पल का 
                                         
मेरे हर इंतजार में एक विश्वास है 
उस विश्वास पर मुझे ऐतबार है 
ऐतबार -ए-शमा कि लौ यु हि जलाउंगी
मंजिल को पाने का अथक प्रयास करती जाऊंगी 




Monday, October 3, 2011

Shayari शायरी










दिल मे बस जाये ऐसा दिलदार चाहते है
जादा नही बस थोडा सा प्यार चाहते है 
इस दिले बहार मे गुले गुलजार चाहते है 
वीरांनी है दिल कि गली 
बस किसी का मोहब्बत -ए- इकरार चाहते है 

just shayari



Sunday, October 2, 2011

Ahimsa अहिंसा

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हिंसा फैलाये अशांति , करे भंग देश की शांति ,
क्यों करते हो ऐसे कम,
बनो अहिंसात्मक और कर जाओ विश्व में ,
अपना प्रसिद्ध नाम ,
गाँधी जी थे अहिंसात्मक, आज नोटों पर छपी है उनकी तस्वीर ,

ए मनुष्य ,...

तुम भी कुछ ऐसा कर जाओ ,
हो जाओ जग में प्रसिद्ध,

हिंसा मन की कामना को बढ़ाये,
तुम्हे पाप के दलदल में फ़साये ,
बुद्धि तो तुमने भी पाई ,
या जब बुद्धि बाँट रहा था खुदा ,तुम गए थे गाय चराई,

ए मनुष्य ,,,

अपनी आँखों से हिंसा का काला चस्मा उतार,
देख,,,

देख ,,,,,

 विशव में कितने काम पड़े है ,
फिर क्यों तुने हिंसा की राह अपनाई ,
हमारे पूर्वज , नेता और पिता ने क्या कम प्रताड़नाए सही थी ,
जो छोटी सी घाव में तुने इतनी उत्पात मचाई ,
ए मनुष्य ,...

छोड़ ये उंच - नीच, भेद - भाव , लडाई - झगडा , मार - काट,
जिले तू उस चमकते सूरज की तरह ,
और छुले वो ऊँचा - नीला आकाश , 

जी कर भी तू  जिया नहीं,
कुछ नेक काम तू किया नहीं ,
ए मनुष्य ,...

काम कर तू ऐसा की 
मरकर भी तू  जीता रहे ,
लोगो के दिल में अमर रहे ,
कर तू कोई नेक काम ,और कर जा विश्व में अपना प्रसिद्ध नाम .......


गांधीजी से जुडी कुछ पुरानी एवं महत्वपूर्ण यादो को जानिए चित्रों के जरिये 

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गांधी जी कि वस्तुये 

सिक्के 


चरखा 


गांधी जी आश्रम 


बचपन 




परिवार 


गांधी जी संग उनकी पत्नी कस्तुरबा गांधी 


युवावस्था 




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