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Sunday, October 2, 2011

Ahimsa अहिंसा

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हिंसा फैलाये अशांति , करे भंग देश की शांति ,
क्यों करते हो ऐसे कम,
बनो अहिंसात्मक और कर जाओ विश्व में ,
अपना प्रसिद्ध नाम ,
गाँधी जी थे अहिंसात्मक, आज नोटों पर छपी है उनकी तस्वीर ,

ए मनुष्य ,...

तुम भी कुछ ऐसा कर जाओ ,
हो जाओ जग में प्रसिद्ध,

हिंसा मन की कामना को बढ़ाये,
तुम्हे पाप के दलदल में फ़साये ,
बुद्धि तो तुमने भी पाई ,
या जब बुद्धि बाँट रहा था खुदा ,तुम गए थे गाय चराई,

ए मनुष्य ,,,

अपनी आँखों से हिंसा का काला चस्मा उतार,
देख,,,

देख ,,,,,

 विशव में कितने काम पड़े है ,
फिर क्यों तुने हिंसा की राह अपनाई ,
हमारे पूर्वज , नेता और पिता ने क्या कम प्रताड़नाए सही थी ,
जो छोटी सी घाव में तुने इतनी उत्पात मचाई ,
ए मनुष्य ,...

छोड़ ये उंच - नीच, भेद - भाव , लडाई - झगडा , मार - काट,
जिले तू उस चमकते सूरज की तरह ,
और छुले वो ऊँचा - नीला आकाश , 

जी कर भी तू  जिया नहीं,
कुछ नेक काम तू किया नहीं ,
ए मनुष्य ,...

काम कर तू ऐसा की 
मरकर भी तू  जीता रहे ,
लोगो के दिल में अमर रहे ,
कर तू कोई नेक काम ,और कर जा विश्व में अपना प्रसिद्ध नाम .......


गांधीजी से जुडी कुछ पुरानी एवं महत्वपूर्ण यादो को जानिए चित्रों के जरिये 

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गांधी जी कि वस्तुये 

सिक्के 


चरखा 


गांधी जी आश्रम 


बचपन 




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गांधी जी संग उनकी पत्नी कस्तुरबा गांधी 


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