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Sunday, September 15, 2013

Adhure Chaand ki puri Raat अधूरे चाँद की पूरी रात ...




करवट - करवट बदलती
 ..... सिलवट - सिलवट चादरों की .....
चुप सी बात , ढ़ेर सारे जज्बात
.......दो अजनबी एक रात .....
.......मुस्कानों की बरसात.....
कभी दाएँ से- कभी बाएँ से
भीनी खुशबू, मोगरे की वास
......अँधेरी रात ......
 ....माथे का अधुरा चमकता चाँद .....
नींद को तोड़ती 
......कंगन की खनखनाहट .....
पर खामोश जुबान
.....मुस्कुराहट बार - बार कई बार ....
अब ख़त्म हो गई
अधूरे चाँद की पूरी रात
.......लो भोर जो हो गई .....
सुन्दर बीती रात
अनछुए पहलू से
पूर्ण निष्ठा और विश्वास 
दो सूत्र मिले 
......महकाने को घर - संसार .....
उस अधूरे चाँद की पूरी रात में......
इस सूत्र के साथ हो गई नई शुरुवात 
 ......नए रिश्तों के सुन्दर सफ़र की.....



29 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी का लिंक कल शनिवार (14-09-2013) को "यशोदा मैया है मेरी हिँदी" (चर्चा मंचः अंक-1368)... पर भी होगा!
    हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहुत सुन्दर रचना....

    सस्नेह
    अनु

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  3. चुप सी बात , ढ़ेर सारे जज्बात
    दो अजनबी एक रात .....wahhh

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  4. करवट - करवट बदलती
    सिलवट - सिलवट चादरों की
    ....बहुत ही सुंदर....शुरूआती पंक्तियों ने ही मन को छू लिया रीना जी

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  5. Beautiful as always.
    It is pleasure reading your poems.

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  6. बहुत ही सुन्दर बेहतरीन अभिव्यक्ति,धन्यबाद।

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  7. सुन्दर अभिव्यक्ति !

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  8. बहुत ही सुन्दर.............

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  9. वाह बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

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  10. wah ! bahut sundar pyar say bhari pyari rachna

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  11. प्रेम की चासनी में डूबे शब्द ...
    प्रेम की महक छू के गुज़र गई हो जैसे ...

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  12. प्रेम के भाव से भरी बहुत खुबसूरत रचना !!

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  13. आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल {बृहस्पतिवार} 19/09/2013 को "हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच}" पर.
    आप भी पधारें, सादर ....राजीव कुमार झा

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  14. ..... सिलवट - सिलवट चादरों की .....
    चुप सी बात , ढ़ेर सारे जज्बात

    सुंदर रचना ...

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  15. बहुत खुबसूरत रचना...

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  16. भीनी खुशबू, मोगरे की वास
    ......अँधेरी रात ......
    ....माथे का अधुरा चमकता चाँद .....
    नींद को तोड़ती
    ......कंगन की खनखनाहट .....
    पर खामोश जुबान
    .....मुस्कुराहट बार - बार कई बार ....

    बहुत सुंदर, बहुत कोमल प्रस्तुति।

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  17. पूर्ण निष्ठा और विश्वास.....sukhi jivn ke do aadhar ...sundar rachna ..

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  18. आपके ब्‍लॉग पर पहली बार आया हूँ। अच्‍छा ब्‍लॉग है। और आपकी यह कविता प्रेम की एक महान, नैतिक अभिव्‍यक्ति है। घर-संसार को सकारात्‍मक प्रेरणा से भरने का आह्वान करती कविता। मैंने ये टिप्‍पणी इसलिए नहीं कि इसे देख कर आप मेरे ब्‍लॉग तक आएं और वहां पर मेरी पोस्‍ट पर टिप्‍पणी करें। आपसे प्रार्थना है मेरी पोस्‍ट को गम्‍भीरता से पढ़े बिना कोई टिप्‍पणी न करें।

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