Followers

Friday, December 27, 2013

wakt वक्त


काश इस वक्त को भी
हमसे प्यार हो जाए
जब आप दूर रहो
तो ये वक्त तेजी से गुजरता जाए
और जब आप पास आओ तो
ये वक्त चुपके से ठहर जाए
काश इस वक्त को भी हमारे
 प्यार  पर प्यार आ जाए

घड़ी के तीनों काँटों कि 
आवाज को महसूस किया है
हर लम्हें में तुम्हें याद किया है
वक्त कि हर आहट याद तुम्हारी 
दे जाती है 
कभी तुमसे मीलने कि खुशी

कभी बिछड़ने का गम साथ ले आती है  


कुछ ख्वाहिशे वक्त कि मोहताज होती है
शायद वो ख्वाहिशे पूरी भी हो जाये कभी..
पर वो बिता हुआ वक्त फिर लौट कर नहीं आ सकता..
जिस वक्त में इन ख्वाहिशो को पूरा होना था..
अजीब दास्ताँ है ये..


Thursday, December 19, 2013

Tera Roop Mera Rang तेरा रूप मेरा रंग



तू कला मै कविता
तू सोच मै शब्द 
तू कागज मै कलम .......
चलो बनाएँ एक 
ऐसी बोलती तस्वीर ,,,,,
जिसमे रूप तुम्हारा हो
और रंग मेरा ......
जिसमे जिस्म तुम्हारा हो 
और सांसे मेरी .....
जिसमे दिल तुम्हारा हो
और धड़कने मेरी ....
जिसमे आँखे तुम्हारी हो
और सपने मेरे ....
जिसमे होंठ तुम्हारे हो
और मुस्कुराहट मेरी ....
जिसमे भावना तुम्हारी हो और
अहसास मेरे .....
आओ गढ़े एक ऐसा चित्र 
जिसमे तेरा रूप और मेरा रंग
मिलकर बन जाए प्रेम तरंग .....

Wednesday, December 11, 2013

Kaha Ho Tum कहाँ हो तुम



सप्ताह के अंत में
होता था तुम्हारा आना …
वो एक शाम 
जो गुजारा करते थे 
तुम मेरे नाम ......
प्रेम कि उष्णता लिए
होंठो पर ढ़ेर सारी मुस्कान
बिसराकर सारे गम - और - ख़ुशी 
हो जाती तुम्हारे प्रेम में
मै पगली गुमसुम गुमनाम.....
पिछले कई सप्ताह से
कर रही हूँ तुम्हारा इंतजार ....
कहाँ खो गए तुम .....
वो प्रेम कि ऊष्मा अब
इंतजार कि ठंड में बदल रही है ....
आँखों के बरसते आंसू अब
इंतजार कि हद बता रहें हैं ....
कहाँ हो तुम
कहाँ चले गए.....


Sunday, December 8, 2013

Mai haari par prem jeet gaya मैं हारी - पर मेरा प्रेम जीत गया


हार और जीत के माइने सबके लिए अलग अलग होते है कोई हार कर भी जीत का सुखद अनुभव प्राप्त कर लेता है,,
कोई जीत कर भी कभी -कभी प्रश्नचिन्ह सा रह जाता है,,,
पर प्रेम में प्रेम के लिए हारना कितना सुखद अनुभव देता है
अपने प्रेम को जीत कि ख़ुशी में आनंदित देख मेरा समर्पण कितना तृप्त हो जाता है ..
प्रेम कि ख़ुशी और मन कि तृप्ति के लिए ये हार मुझे तो हार सी नहीं लगती....
लो आज फिर हार गई मैं
" मैं हारी - पर मेरा प्रेम जीत गया "
हारकर भी जीत का सुखद अनुभव
आहा || मन कितना तृप्त हो गया 
         हाँ यही तो प्रेम है.....
ये मेरा अलग सा प्रेम अहसास है..
इसलिए तो जरा खास है........
सुखद हार जीत के बाद अब कुछ मीठा हो जाये....
:-)

Sunday, December 1, 2013

Nanhi Chidiya Aur Uske Sawaal नन्हीं चिड़िया और उसके सवाल


----नन्हीं चिड़िया---
जो उड़ना चाहती थी अपने हिस्से कि उड़ान
देखना चाहती थी खुला आसमान ......
नापना चाहती थी अपने हौसलों कि ऊंचाई को
और पूरा करना चाहती थी 
अपने कुछ अरमान .......
पर ऐसा हो ना पाया
निकली छोड़कर जब घोंसला अपना
चील -कौवों के तो हो गए वारे- न्यारे ,,,,
थी इस सत्य से वो अंजान
कि, कुछ नशीली आँखे,,,,
उसकी ऊंचाइयों को देख नहीं पा रहीं है
कुछ कि चोंच उसे नोच खाने 
को बेसब्र , बड़ी आतुरता से
अपने पुरे वेग से उसकी ओर बढ़े जा रहा है .......
देख इनकी दृष्टता मन घबराया 
बचाने अपने दामन को 
झट्ट लौट आई,,,,
अपने उस नन्हें घोंसले में
क्या ये घोंसला ही उसकी मर्यादा बनकर रह गयी है
सवाल???
ह्रदय दहलाने वाला सवाल ??? 
वो पुरुष जो माता के बराबर ही सृजनकर्ता है ,,,,,
जो बरगद कि छाँव कि तरह है ,,,,,
रक्षाबंधन पर अपनी बहन कि 
रक्षा करने का वचन लेता है ,,,,,
फिर क्यूँ वो अपने घरों से बाहर निकलकर 
बन जाता है चील और कौवा,,,,
नोंच खाने को तत्पर - व्याकुल ......
एक नन्हीं चिड़िया
क्यूँ देखती है सभी को शक कि नजर से
सवाल ???
मन को डरानेवाला ???
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...