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Sunday, February 9, 2014

mera gussa tumhara pyar मेरा गुस्सा तुम्हारा प्यार...



मुझे याद है सौम्या वो दिन जब मैं बहुत गुस्से में था,और तुमपर खूब चिल्लाया...पर मैं करता भी क्या और मैंने तुमसे कहा भी था जब मैं गुस्से में होता हूँ तो तुम मुझसे दूर ही रहा करो... पर तुम कहाँ मानने वाली थी ..
और मुझसे कहने लगीं.... जब तुम्हारे प्यार ,तुम्हारे दुलार, तुम्हारी हर चीज पर ,तुम पर भी मेरा पूरा हक़ है,तो फिर तुम्हारे गुस्से पर क्यूँ नहीं...
जब प्यार के हरपल को हम साथ में जीते हैं ,,तो फिर गुस्से कि आग में मैं तुम्हें अकेले क्यूँ जलने दूँ ..
जो भी हो मील बाँटकर लेंगे , हर परेशानी हर मुश्किलों को दूर करेंगे ....

तुम्हारा वो प्यारा सा सवाल --- "क्या मेरा प्यार तुम्हारे इस गुस्से कि आग को ठंडा नहीं कर सकता ????"
सच सौम्या उस वक्त तुम्हारी आँखों में इतनी मासूमियत थी कि उसी पल को मेरा गुस्सा शांत हो गया था....
और हाँ तुम्हारा वो हार्ट शेप चॉकलेट उसे कैसे भूल सकता हूँ ...आज मैं भी लाया हूँ तुम्हारे लिए हार्ट शेप चॉकलेट ...
आओ सौम्या कुछ मीठा हो जाये....
हैप्पी चॉकलेट डे..










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