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Wednesday, January 7, 2015

meri gudiya मेरी गुड़िया



गुलाबी सी रंगत लिए 

जब वो आई आँखों में 
ख़ुशी का सागर उमड़ने लगा .....
ममता को और भी 
करीब से जाना .....
जब खुद माँ बनी
और माँ की ममता 
को पहचाना ......
हर वक्त हर बात पर
दिल घबरा जाता था ....
जब भी रोती मेरी गुड़िया 
दिल मेरा सहम जाता था ....
चहरे पर उसके
हरपल मुस्कान आये ....
कभी कोई तकलीफ 
न उसे सताए ....
गुड़िया मेरी बड़ी हो जाये
पढ़े - लिखे खूब नाम कमाएँ ....
हर पल दिल से बस
यही दुआ निकलती है ......
खुश रहे मेरी गुड़ियाँ
हर माँ की तो बस
यही चाह रहती है.....







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9 comments:

  1. बहुत प्यारी सी गुडिया है बिलकुल कविता जेसी.
    धन्यवाद

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  2. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (09.01.2015) को "खुद से कैसी बेरुखी" (चर्चा अंक-1853)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।

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    Replies
    1. आभार राजेंद्र जी..

      Delete
  3. ममता का भाव, सुंदर कविता सुंदर सी गुड़िया के लिए ...सुख-शान्ति, समृद्धि, प्रसन्नता, सफ़लता एवं आरोग्य की मंगलकामनाओं के साथ नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें!!

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  4. ममता के हिलोरे लेती रचना ...
    सुन्दर रचना ...

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