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Tuesday, December 3, 2019

Aakhir kab ? आखिर कब ?





आखिर कब ?
आखिर क्यों
आखिर कबतक
यूँ बेआबरू
होती रहेंगी बेटीयाँ
आखिर कबतक
हवाला देंगे हम
उनके पहनावे का
उनकी आजादी का
उनकी नासमझी
और समझदारी का
क्यों नहीं ऊँगली उठती
उन वैहशी नज़रों पर
उनके मलिन मस्तिष्क पर
और कहाँ सोया है
हमारा कानून
क्यों नहीं बनाता
कोई मिसाल
की जुल्म के बारे में
सोचकर ही काँप उठे
उन बेदर्दों की आत्मा
और उड़ सके ये बेटीयाँ
बिना किसी डर के
अपनी उड़ान..
आखिर डर के साए
में कबतक जीना होगा
बेटियों को ,
कब देंगे हम उन्हें यह विश्वास
की वो है अब सुरक्षित ?
कब दे पाएँगे हम उन्हें
खुला आसमान ??
आखिर कब ???

Thursday, September 5, 2019

शिक्षक दिवस




डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी एक महान शिक्षक थे हर वर्ष 5 सितंबर अर्थात उनके जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाते है। जीवन को सार्थक बनाने में एवं विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में शिक्षक का अतुलनीय योगदान होता है। पाठ्यक्रम की शिक्षा के साथ ही संस्कार, समझ , कौशल या कह ले की जीवन जीने की हर कला का ज्ञान हमे हमारे शिक्षकों से ही प्राप्त होता है। बच्चों के उज्वल भविष्य का दायित्व शिक्षक पर ही होता है और अपने दायित्व निर्वाह में वे कभी कोई कमी नहीं लाते हैं। 
               जिस तरह एक माता - पिता का सपना होता है की उनके बच्चों का भविष्य उज्वल हो उसी प्रकार हर शिक्षक की भी यही खवाहिश होती है की उनके द्वारा पढाए गए प्रत्येक विद्यार्थी का भविष्य उज्वल हो ।इसलिए हमें अपने गुरु को माता - पिता की भांति ही समझना चाहिए। उनकी डांट - फटकार से हमारा सम्मान घटता नहीं है बल्कि बच्चों को अपने नजरिये को ठीक करने की जरुरत है । जो भी शिक्षक हमें डाँटते है इसका अर्थ यह होता है की वो हमारी फिक्र करते हैं हमें सुधारना चाहते हैं । अगर शिक्षक हमारी गलतियाँ हमें ना बताएँ तो हम क्या सिख लेकर सफल होंगे । क्यूँकी अवगुण और दोष के साथ कोई सफल हो भी नहीं सकता है ।
 गुरु ज्ञान का सागर है 
गुरु गुणों का है भंडार 
गुरु बिन अज्ञानता की नईया को 
कौन लगाए पार 
               बात बिलकुल सही है परंतु आज के परिवेश में हालात कुछ ऐसे बन गए हैं जहाँ पर शिक्षक विद्यार्थियों से कुछ कहते भी हैं तो विद्यार्थी उसे अपना अपमान समझते है । यह गलतफहमी उनके मन पर इस कदर हावी हो जाती है की वे या तो अपने गुरु को ही ठेस पहुँचाते है या स्वयं ही आत्महत्या जैसे कायरतापूर्ण कदम को अंजाम देते हैं । परंतु यह बात क्या सही है जो शिक्षक हमें निःस्वार्थ भाव से पढ़ाते है क्या उन्हें हमारी गलतियों पर डाँटने का भी हक़ नहीं है । 
भविष्य हमारा बनाते शिक्षक
 हमको ज्ञान सिखाते शिक्षक
 शिक्षा , संस्कार , आदर्श, कौशल
 कुशल व्यक्ति बनाते शिक्षक
              इसलिए हमें सदैव अपने शिक्षक का सम्मान करना चाहिए। 5 सितंबर यह दिवस तो खास ही है पर हमें हर दिन को खास बनाना चाहिए । क्यूँकी गुरु को कोई उपहार आकर्षित नहीं करता है बस उन्हें तो सदैव अपने विद्यार्थियों से प्यार और सम्मान की चाहत होती है
रीना मौर्य मुस्कान 
मुंबई महाराष्ट्र

Tuesday, August 13, 2019

प्रगतिपथ अपनाओ तुम



एक माँ के दो बेटे 
आपस में बैर रखते है 
धर्म की चादर ओढ़ के 
एक-दूजे से लड़ते - झगड़ते है 
प्रेम की भाषा को समझो तुम 
हिंसा से कुछ न पाओगे 
जाति-धर्म के नाम पर 
क्या लाशे ही बिछाओगे 
मर गए देखो कितने भाई 
अब कितना लहू बहाओगे 
रोती है माँ बिलख -बिलखकर 
अब कितने चिराग बुझाओगे 
सुनो ऐ भाई , सुनो ऐ बंधू 
यह देश हमारी शान है 
जिसको तुम हानि पहुँचाते
वो मिट्टी बड़ी महान है 
इस मिट्टी की लाज रखो तुम 
क्यों आपस में लड़ते हो 
होगा कुछ ना हासिल तुमको 
बात नहीं तुम समझते हो 
वर्तमान की माँग को समझो 
प्रगतिपथ अपनाओ तुम 
जीवन देखो सुखमय होगा
बस दिल से दिल को मिलाओ तुम 

रीना मौर्य मुस्कान

Tuesday, July 23, 2019

chhata - छाता - बालकविता

     छाता☔️☔️☔️⛈️⛈️


मुझको प्यारा मेरा छाता
ये बारिश से मुझे बचाता

नहीं कभी मै इसको भूलूँ
संग इसको लेकर मै घूमूँ

जब भी आती बरखा रानी
खूब बरसाती हमपर पानी

छाता हमें बचाता है
घर हमको पहुँचाता है

Saturday, April 6, 2019

chhoti -chhoti baten छोटी छोटी बातें



आजकल बहुत कमियाँ 
निकालने लगे हो तुम
सीधे -सीधे कह दो ना की
अब तुम्हें हमारी जरुरत नहीं 
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गम बहुत है जहाँ में 
पर आँसूओं से हासिल क्या 
जिंदगी को जीने के लिए 
मुस्कान की जरुरत है 
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नशा सिर्फ जाम से ही नहीं होता 
" घमंड " और " अहंकार " भी 
बहुत नशीले होते हैं 
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कुछ होने के लिए 
वजह की जरुरत नहीं होती
कभी बेवजह भी
बहुत कुछ हो जाता है 
जिससे आवाज आई 
सिर्फ वही नहीं टुटा है 
बिना आवाज किये भी 
बहुत कुछ टूट जाता है
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तुम दुआ बनकर 
मेरी जिंदगी में आना
और मै मुस्कान बनकर 
तुम्हारे होंठो पर बस जाऊँ
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बातों की मार 
घमंड 
शक 
और जलन 
कर देते है 
रिश्तों का
 दहन
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अकेले में तो 
दुश्मन भी 
हाँ में हाँ 
मिलाते हैं 
तुम अगर 
दोस्त हो तो 
महफ़िल में आओ 
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हाल-ए- मिजाज कुछ 
बदला -बदला सा है उनका 
जुबान कुछ और कह रही है 
मुस्कान कुछ और 
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ठोकर लगी है शीशे को 
इसलिए तो टुटा है
और लगी है बड़ी जोर से 
इसलिए तो इतना बिखरा है 
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Sunday, March 31, 2019

jogan जोगन



जोगन का है रूप धरा 
जोगन तेरी कहलाऊँगी
और नहीं कुछ चाह है प्रियतम
भजन तेरे ही गाऊँगी
मन के मंदिर में मै अपने 
मूरत तेरी सजाऊँगी
मै तेरी दीवानी साँवरे
तुझे नैनन में बसाऊँगी
तुम मेरे भगवन हो कान्हा 
मै हूँ तेरी जोगनियाँ
दर्शन दे दो हे प्रभुवर 
मै तृप्त मन हो जाऊँगी
दर्शन को तेरे नैना तरसे 
तरस- तरस के नैना बरसे
मन भी अब विचलित है डर से
और अधिक ना करो विलंब
मै मीरा दीवानी तेरी
जोड़ी तुझसे प्रीत की डोरी 
अब और नहीं कुछ चाह है मेरी 
मिल जाये जो तेरा दर्शन 
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