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शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

Dard दर्द



मुझे पाना चाहती थी वो 
पर मेरी हा का इंतजार करती थी 
पर अधिक इंतजार भी कर ना पाई वो 
मुझसे बेपनाह प्यार जो करती थी 
चाहत कि हद पार कर 
शर्मो - हया को छोडकर 
मेरी बाहो में समा गई
बहते अश्रू से मेरे ह्रदय को भीगा गई 
सांसो में सिसकीया
आंखो में अश्क
कापते होंठ उसके 
मन में कश्मकश 
रुवासा चेहरा 
आंखो में सवाल 
क्यू करवा रहा था ,,, उससे मै इंतजार ?
चाहती थी वो मुझसे इसका जवाब ......
क्या देता जवाब मैं..
मैं तो खुद हि जिंदगी का सवाल था ...
क्युंकी मैं चंद लम्हो का हि मेहमान था ...


just a poem 
read it feel it .....








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