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रविवार, 5 जनवरी 2014

mamta ki chhanv ममता कि छाँव



माँ रहती है तो सबकुछ 
कितना आसान होता है
जैसे कोई गम ...
कोई दुःख ...
कोई कठिनाई ...
बस छूकर निकल गई हो जैसे
हर तकलीफ हर गम से माँ उबारती है
बड़े ही सलीके और प्यार से समझाती है
हिम्मत और हौंसला है माँ
माँ तुझसे ही है मेरा जहाँ .....


माँ एक शब्द 
कितने अहसास
कितना प्रेम , 
कितने अपनत्व,
 कितने जज्बात
भर आँचल ममता ,
कितनी ही चिंता,,
हरपल आँखों में 
प्यारा सा सपना सजाती
अपने लाड़ले - लाड़लियों के लिए 
कितने ही त्याग देती 
एक चलती- फिरती मुस्कुराती देवी है माँ...
माँ तुझसे ही है मेरा जहाँ .....

37 टिप्‍पणियां:

  1. माँ तो माँ ही होती है उस जैसा और कोई हो ही नहीं सकता। सुंदर भावपूर्ण अभिव्यक्ति ....:)

    जवाब देंहटाएं
  2. माँ तुझसे ही है मेरा जहाँ .....बहुत सुन्दर..

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत ही सुन्दर भाव.......
    अच्छी रचना....
    सस्नेह
    अनु

    जवाब देंहटाएं
  4. माँ वह दर्पण है जिसमे बच्चे का हर रूप दिखाई देता है |
    नया वर्ष २०१४ मंगलमय हो |सुख ,शांति ,स्वास्थ्यकर हो |कल्याणकारी हो |

    नई पोस्ट सर्दी का मौसम!
    नई पोस्ट विचित्र प्रकृति






































    |

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज सोमवार (06-01-2014) को "बच्चों के खातिर" (चर्चा मंच:अंक-1484) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    जवाब देंहटाएं
  6. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन एक छोटा सा संवाद - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    जवाब देंहटाएं
  7. सच में माँ ऐसी ही होती है ! बहुत ही कोमल एवँ मर्मस्पर्शी रचना !

    जवाब देंहटाएं
  8. ऐसी ही होती है माँ ! बहुत ही कोमल एवँ मर्मस्पर्शी रचना !

    जवाब देंहटाएं
  9. काफी उम्दा रचना....बधाई...
    नयी रचना
    "अनसुलझी पहेली"
    आभार

    जवाब देंहटाएं
  10. बहुत सुन्दर और भावुक रचना, बधाई.

    जवाब देंहटाएं
  11. अति सुंदर रचना के लिए बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  12. भावपूर्ण ... माँ से ये जहान है उसी से सब खुशियाँ ... वो चाहे किसी भी पल को ख़ुशी में बदल सकती है ...

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  13. बहुत सुन्दर रचना .. माँ के बारे में जितना कहा जाये कम ही है ..

    जवाब देंहटाएं
  14. माँ ही जीवन का सार्थक सृजन देती है
    बहुत सुंदर और भावुक
    बहुत खूब--
    बहुत बहुत बधाई

    नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाऐं

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  15. सुंदर भाव ... माँ तो बस माँ है

    जवाब देंहटाएं
  16. माँ का स्थानापन्न तो कोई भी हो ही नहीं सकता..बहुत भावपूर्ण रचना...

    जवाब देंहटाएं
  17. आपकी इस ब्लॉग-प्रस्तुति को हिंदी ब्लॉगजगत की सर्वश्रेष्ठ कड़ियाँ (3 से 9 जनवरी, 2014) में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,,सादर …. आभार।।

    कृपया "ब्लॉग - चिठ्ठा" के फेसबुक पेज को भी लाइक करें :- ब्लॉग - चिठ्ठा

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  18. माँ एक शब्द
    कितने अहसास
    कितना प्रेम ,
    कितने अपनत्व
    कितने जज्बात
    माँ का संसार सचमुच अद्भुत है जो पग-पग में विस्‍मृत कर देता है ... उत्‍कृष्‍ट अभिव्‍यक्ति

    जवाब देंहटाएं
  19. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!

    जवाब देंहटाएं
  20. मन के भावों का विस्तार कविता की अभिव्यक्ति में दिख रहा है.
    अच्छी लगी यह रचना ....!!

    जवाब देंहटाएं
  21. माँ सम दूजा कौन जगत में।
    सुंदर प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  22. बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति...माँ को नमन...
    http://himkarshyam.blogspot.in

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