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शनिवार, 20 अक्तूबर 2012

Ruthe Huve Ho Kyun रूठे हुवे हो क्यूँ...




खता कुछ कर गई मैं 
पर वफ़ा भी कम ना की....

दी सदायें मोहब्बत की बहुत
पर उसने माफ़ी ना दी....

दी दलीले बहुत खता की
पर उसने सजा ही दी....

रूठ बैठे है वे जालिम
 छोटी सी बात पर.......

और कहते रहे सभी से
 की हमने वफ़ा ना की....

कब तक मनाएगी रीना
 उस रूठे मोहब्बत को......

जिसे तेरे दर्द - ए - दिल की 
धड़कन  भी सुनाई ना दी.....

खता कुछ कर गई मैं 
पर वफ़ा भी कम ना की....






41 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब ,रीना जी

    खता कुछ कर गई मैं
    पर वफ़ा भी कम ना की....

    दी सदायें मोहब्बत की बहुत
    पर उसने माफ़ी ना दी.....

    जवाब देंहटाएं
  2. तुम्हारी नज़र क्यों खफा हो गई
    खता बक्श दो गर खता हो गई .... बहुत अच्छा लिखा है रीना !

    जवाब देंहटाएं
  3. .. सुन्दर प्रस्तुती

    बधाई स्वीकारें। आभार !!!

    आपकी ये पोस्ट पढ़ के मुझे अदनान सामी जी का एक गाना याद आ गया

    ....बिन तुम्हारे मेरा दिल लगे है कहीं ना
    दूर जाके तुमसे मुझे ना जीना
    मेरे दिल को यूँ ना तोड़ो
    रूठे हुवे हो क्यों
    मिलके जुदा हो क्यूँ
    कुछ कहो कुछ सुनो
    ऐसे बैठे हो क्यों ....

    जवाब देंहटाएं
  4. खता कुछ कर गई मैं
    पर वफ़ा भी कम ना की....

    दी सदायें मोहब्बत की बहुत
    पर उसने माफ़ी ना दी....

    जहाँ प्यार बे इन्तहां हो अक्सर वहां ऐसा हो जाता है .बस यही प्यार है

    जवाब देंहटाएं
  5. अर्रे मान जायेंगे....
    तुझ सी वफ़ा और तेरी मोहब्बत और कहाँ पायेंगे...

    :-)

    सस्नेह
    अनु

    जवाब देंहटाएं
  6. जिसे तेरे दर्द - ए - दिल की
    धड़कन भी सुनाई ना दी.....
    खता कुछ कर गई मैं
    पर वफ़ा भी कम ना की....बेहतरीन रचना,,,,,

    RECENT POST : ऐ माता तेरे बेटे हम

    जवाब देंहटाएं
  7. खता कुछ कर गई मैं
    पर वफ़ा भी कम ना की....
    दी सदायें मोहब्बत की बहुत
    पर उसने माफ़ी ना दी........बेहतरीन रचना,,,

    RECENT POST : ऐ माता तेरे बेटे हम

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत प्यारी रचना | बहुत खूब |

    जवाब देंहटाएं
  9. "खता कुछ कर गई मैं
    पर वफ़ा भी कम ना की...."
    लाजवाब कहें या वाह कहें...!पर दोनों ही इस रचना के लिए बने है...|

    जवाब देंहटाएं
  10. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें। मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है। धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  11. यहाँ रीत है ज़िक्रे ज़फ़ा की ...
    आप बात करती हैं वफ़ा की ???
    खुश रहें!

    जवाब देंहटाएं
  12. reena ji aapko yahan http://bloggers-word.blogspot.in joda gaya hai, kripya padharein.

    जवाब देंहटाएं
  13. भावनाएं निःशब्द होकर भी शब्द ढूंढ लेती हैं।
    अच्छी रचना।

    जवाब देंहटाएं

  14. bahut sundar prastuti,"khataye khoobshurat hogyee gr,khooshboo bn bikhrti hai....a'खता कुछ कर गई मैं
    पर वफ़ा भी कम ना की....

    जवाब देंहटाएं

  15. खता कुछ कर गई मैं
    पर वफ़ा भी कम ना की....

    दी सदायें मोहब्बत की बहुत
    पर उसने माफ़ी ना दी....

    दी दलीले बहुत खता की
    पर उसने सजा ही दी....

    रूठ बैठे है वे जालिम
    छोटी सी बात पर.......

    और कहते रहे सभी से
    की हमने वफ़ा ना की....

    कब तक मनाएगी रीना
    उस रूठे मोहब्बत को......

    जिसे तेरे दर्द - ए - दिल की
    धड़कन भी सुनाई ना दी.....

    खता कुछ कर गई मैं
    पर वफ़ा भी कम ना की....


    बहुत सुन्दर लिखा है

    रीना बेटे जी .बधाई (दलीलें ,रूठे बैठें हैं वो जालिम )आपकी गेस्ट पोस्ट पर द्रुत टिपण्णी के लिए आपका आभार .



    जवाब देंहटाएं
  16. खता...वफ़ा..मोहब्बत..माफ़ी..दलील..सजा.......

    जवाब देंहटाएं
  17. बहुत प्यारी रचना, शानदार गीत के साथ।

    जवाब देंहटाएं
  18. उत्तम रचना दशहरे पर हार्दिक शुभ कामनाएं |
    आशा

    जवाब देंहटाएं

  19. खता कुछ कर गई मैं
    पर वफ़ा भी कम ना की....

    हर बार की कोशिश आपको हँसाने की
    पर क्यूँ ना आई कोई कला रूठे को मनाने की

    post

    चार दिन ज़िन्दगी के ..........
    बस यूँ ही चलते जाना है !!

    जवाब देंहटाएं
  20. दी सदायें मोहब्बत की बहुत
    पर उसने माफ़ी ना दी....

    दी दलीले बहुत खता की
    पर उसने सजा ही दी....

    बहुत सुंदर प्रस्तुति.

    जवाब देंहटाएं
  21. खता कुछ कर गई मैं
    पर वफ़ा भी कम ना की....
    तारीफ के लिए हर शब्द छोटा है - बेमिशाल प्रस्तुति - आभार.

    जवाब देंहटाएं

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