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गुरुवार, 2 अक्टूबर 2014

Wo aurat वो औरत


वो औरत जब निकलती है घर से
दर्जनभर सुहाग की निशानिया पहनकर
सिंदूरी आभा बिखेरती उसकी माँग
गले में लटकाये तोलाभर मंगलसूत्र 
हाथों में पिया नाम की मेहंदी
और दर्जन - दो- दर्जनभर चूड़ियाँ 
पैरों की उंगलियो में हीरे जड़ित चाँदी के बिछुए
गहरे गुलाबी रंग के आलते से रंगे उसके पांव 
खुद को पल्लू में छुपाती,मुस्काती 
बड़ी ही खुशमिजाज लग रही थी
पर कोई न देख पाया उसकी 
एक और सुहाग निशानी 
जिसे उसने छुपा रखा है 
इनसभी सुहाग निशानियों के बीच 
कजरारी अँखियों में छुपी रोती हुयी आँखे
वो घाव जो उसकी चूड़ियों के बीच से कराह रहे थे
वो घाव जो उसके सुहाग की बर्बरता को 
चीख -चीख कर सुनाने की भरसक कोशिश कर रहे थे...
पर इन सुहाग निशानियों को छिपा दिया है 
उसने अपनी चमचमाती सुहाग निशानियों के बीच....
वो औरत ....
उस औरत ने....






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गुरुवार, 18 सितंबर 2014

Prem प्रेम



मैंने कहा प्रेम और 

उसने मेरा नाम लिख दिया ....
अश्को के मोतियों से 
मेरे काँधे को भिगो दिया ....
हाथ थाम मेरा 
बड़ी शिद्दत से जो उसने कहा ,,,
चलोगी साथ मेरे
हां कह दिया मन ने 
और मेरा दिल उसके साथ चल दिया....
मैंने कहा प्रेम -
और उसने मेरा नाम लिख दिया .....

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उदास लम्हों को दूँ उलाहना 
की तू चला जाये .....
खुशनुमा पलों से करूँ गुजारिश
की वो जरा ठहर जाये .....
आज जश्न - ऐ - बहार होगा 
खुशियां होंगी साथ 

लबों पर सजेंगी मुस्कानें ...
आज बड़े दिनों बाद
मेरे हाथों में
मेरे सनम का हाथ होगा....

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रविवार, 17 अगस्त 2014

oo more kanha ओ मोरे कान्हा


श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें *.*.*...



ओ मोरे कान्हा 
तू ना बंसी बजाना ......
बंसी की धुन पर 
धड़क ऊठे मोरा जिया ....
तेरे चरणों में बैठ 
बिसरू सारी दुनिया ....
ना ना तू बंसी ना बजाना
देख साँझ हो गयी है कान्हा .....
मुझे घर भी तो है जाना
ओ मोरे कान्हा तू ना बंसी बजाना ....












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सोमवार, 30 जून 2014

अहसास



यूँ बारिश में भीगना 

चहरे पर रिमझिम बूंदों का गिरना
ठन्डे-ठन्डे अहसास में
जब तुम प्यार से बुलाते हो
सालसा के डांस पर 
पुराने गीत गुनगुनाते हो
" आज फिर तुमपे प्यार आया है
बेहद और बेहिसाब आया है "
चार पंक्ति के गीत 
और सालसा के चार फेरों में 
जब तुम्हारा रोमांस ख़त्म हो जाता है
डर में मुस्कराहट घोलकर
कॉफी की मांग करते हो
सच पूछो तो बड़े भोले से लगते हो
ठंडी बयार , भीगा सा मौसम
और गरमागरम कॉफी के साथ
जब तुम कहानीयाँ सुनाते हो
एक अलग ही सपनों की 
दुनिया में ले जाते हो
गाल पर हाथ धर
शून्य में देखते हुए 
कॉफी की चुस्कियां लेते हो
सच पूछो तो बड़े भोले से लगते हो










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