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Friday, May 9, 2014

Naari Roop नारी रूप


नारी तू है मूरत एक
लेकिन तेरे रूप अनेक ......

जन्म लिया जब बेटी बनकर
किलकारी से किया घर को गुंजन
मधुर पाजेब कि झंकार से
पुरे घर में करती तू झम-झम
बनी किसी कि जब तू दुल्हन
रोशन करती उसका घर-आँगन
घर में आई धर लक्ष्मी रूप
पवित्रता तेरी माँ तुलसी रूप

नारी तू है मूरत एक
लेकिन तेरे रूप अनेक ......

आई जब तू ममत्व धरा पर
अाँचल में अमृत रस भर
ह्रदय में लिए प्रेम अपार
करती तू बच्चों का जीवन साकार
और भी हैं तेरे कितने रूप
तू हरदम सहती छाँव और धूप

मिलता जब भी स्नेह तुम्हें
महकती बन तू कोमल फूल 
नजर पड़े जो अस्मत पर तेरे
तू बन जाती कठोर शूल 

नारी तू है मूरत एक
लेकिन तेरे रूप अनेक ....








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25 comments:



  1. ☆★☆★☆



    आई जब तू ममत्व धरा पर
    अाँचल में अमृत रस भर
    ह्रदय में लिए प्रेम अपार
    करती तू बच्चों का जीवन साकार

    वाह वाऽह…!

    आदरणीया रीना मौर्य जी
    नारी का हर रूप वंदनीय है...
    अच्छा लिखा आपने...
    सुंदर कविता !

    मंगलकामनाओं सहित...
    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन भारत का 'ग्लेडस्टोन' और ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (10-05-2014) को "मेरी हैरानियों का जवाब बस माँ" (चर्चा मंच-1608) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. नारी का हर रूप संघर्ष और प्रेम से संचित है .........सुन्दर रचना ....

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  5. बहुत बढ़िया मैम !


    सादर

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  6. बेहद सुन्दर रचना

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  7. नारी के सब रूपों में सबसे सुंदर है उसका ममता बरा रूप।

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  8. नारी चाहे किसी रूप में क्यों न हो पूजनीय है उसका त्याग, शक्ति अतुलनीय है , सुन्दर रचना

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  9. सुन्दर भावाभिव्यक्ति....नारी के विभिन्न रूपों और भावों का खूबसूरत चित्रण.... हार्दिक बधाई...

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  10. वाह ! बहुत ही सुंदर प्रस्तुति ...!
    मातृदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

    RECENT POST आम बस तुम आम हो

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  11. नारी हर रूप में सहज है .. पूर्ण है ..
    दिल को छूते हैं आपके भाव ... सुन्दर रचना है ...

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  12. This comment has been removed by the author.

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  13. sahi baat kahi aapne ....bahut sundar rachna

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  14. nari tere roop anek....
    .
    .bahut sunder prastuti..

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  15. भावपूर्ण सार्थक रचना और उम्दा प्रस्तुति के लिए आपको बहुत बहुत बधाई...
    नयी पोस्ट@आप की जब थी जरुरत आपने धोखा दिया (नई ऑडियो रिकार्डिंग)

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  16. नारी तू है मूरत एक
    लेकिन तेरे रूप अनेक ...बहुत खूब

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  17. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति ...!
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है

    राज चौहान
    http://rajkumarchuhan.blogspot.in

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  18. नारी के हर रूप का सम्मान करो। नहीं तो एक दिन तुम माँ बहन पत्नी बेटी ..... के लिए तरस जाओगें।

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