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रविवार, 18 सितंबर 2011

Nayi Purani Yadon Ke Sath नयी पुरानी यादो के साथ


कुझ नयी पुरानी यादो के साथ 
चलती जा रही हु 
कुझ जाने अन्जानो के साथ
 मिलती जा रही हु 
कुझ नये अह्सासो मे
घुलती जा रही हु 
 कुझ नयी कल्पना मे
 उलझती जा रही हु 
कुझ नये स्वप्नलोक मे
 डूबती जा रही हु 
चंद शब्दो मे कहू तो 
मैं खुश्नुमा अह्सासो कि फिजाओ मे  
स्वतंत्र पन्झी कि तरह उडती जा रही हु 
बस  उडती जा रही हु .......

6 टिप्‍पणियां:

  1. अहसासों का बहुत अच्छा संयोजन है ॰॰॰॰॰॰ दिल को छूती हैं पंक्तियां ॰॰॰॰ आपकी रचना की तारीफ को शब्दों के धागों में पिरोना मेरे लिये संभव नहीं

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