पुरवाई मेरे मन की
चलती चले - चलती चले
गाँव , शहर , गली- गली
डगर - डगर
पत्तों से लड़ी ,कभी फूलों से मिली
समुंदर में गई लहरों को उछाला
किसी के आँचल को उड़ाए
तो कभी बालों में घुस जाए
किसी की खुशबू को
किसी तक पहुँचाती है
प्रेम फैलाती है , मन बहकाती है
शीतलता लाती है
पुरवाई मेरे मन की
देखो क्या - क्या करती है
मेरा बहता मन
मन काबू में कहाँ
कभी हवा की तरह चले
कभी पंछी की तरह उड़े
जबरदस्ती बैठा दो जमीन पर
तो मन पानी की तरह बहे
मेरा बहता मन
कभी ना रुके ...
|
poem,poem for children,current article,article about children,hindi poem ,story, short story,hindi quote,short quote,hindi short quote,love quote,hate quote,hindi poem
*** मेरा मन *** लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
*** मेरा मन *** लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शनिवार, 14 जुलाई 2012
Mera Man *** मेरा मन ***
सदस्यता लें
संदेश (Atom)

