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शनिवार, 14 जुलाई 2012

Mera Man *** मेरा मन ***



पुरवाई मेरे मन की 
चलती चले - चलती चले
गाँव , शहर  , गली- गली 
डगर - डगर
पत्तों से लड़ी ,कभी फूलों से मिली 
समुंदर में गई लहरों को उछाला 
किसी के आँचल को उड़ाए 
तो कभी बालों में घुस जाए
किसी की खुशबू को
किसी तक पहुँचाती है 
प्रेम फैलाती है , मन बहकाती है
शीतलता लाती है 
पुरवाई मेरे मन की 
देखो क्या - क्या करती है 





मेरा बहता मन 
मन काबू में कहाँ 
कभी हवा की तरह चले 
कभी पंछी की तरह उड़े 
जबरदस्ती बैठा दो जमीन पर
तो मन पानी की तरह बहे
मेरा बहता मन 
कभी ना रुके ...

37 टिप्‍पणियां:

  1. बढिया रचना है इस से पहली रचना वर्षा पर बहुत सशक्त है 'हीना 'शब्द खटकता है कृपया 'हिना' कर लें.चित्र और संगत रचना दोनों बढिया बन पड़ी हैं .बधाई .

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  2. बहुत सुन्दर है यह मन कभी पुरवाई बनकर खुशबू बिखेरता है कभी पंछी की तरह उड़ता है...

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर रचनाएँ रीना....
    प्यारे से एहसास हैं इनमे...

    अनु
    समुंदर में गई लहरों को उझाला....यहाँ उछाला कर लो.

    जवाब देंहटाएं
  4. मन की पुरवाई ...और बहता मन ... मन भावन सावनी रचनायें..
    शुभकामनायें..

    जवाब देंहटाएं
  5. शीतलता लाती सदा, पवन चले पुरवाई,
    मन का आँचल उड़ता,खुशबू है बिखराई,,,,,,

    सुंदर भाव,,,,,,,

    RECENT POST...: राजनीति,तेरे रूप अनेक,...

    जवाब देंहटाएं
  6. वो मन ही क्या जो.......................

    मनमोहक प्रस्तुति......

    जवाब देंहटाएं
  7. शानदार प्रसतुति बहुत बढिया !आपके ब्‍लाग को ज्‍वाईन कर लिया है युनिक को आप भी करे तो खुशी होगी
    युनिक तकनीकी ब्‍लाग

    जवाब देंहटाएं
  8. पुरवाई मेरे मन की
    देखो क्या - क्या करती है

    मेरा बहता मन
    कभी ना रुके ...

    superb lines

    जवाब देंहटाएं
  9. जीवन का यही तो सच है. मन की सोंच कहाँ रूकती है वह तो बहती ही रहती है .सुंदर प्रस्तुति.

    जवाब देंहटाएं
  10. मन काबू में कहाँ
    कभी हवा की तरह चले
    कभी पंछी की तरह उड़े
    जबरदस्ती बैठा दो जमीन पर
    तो मन पानी की तरह बहे
    मेरा बहता मन
    कभी ना रुके ...
    ...यूँ ही निरंतरता में मन बहता रहे

    जवाब देंहटाएं
  11. निरंतरता का अपना महत्त्व है |सुन्दर और भावपूर्ण |
    आशा

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  12. किसी के आँचल को उड़ाए
    तो कभी बालों में घुस जाए
    किसी की खुशबू को
    किसी तक पहुँचाती है
    बहुत सुन्दर भाव प्रस्तुत किये आपने ,इस रचना के जरिये.आप कभी कभी लिखती हैं लेकिन कमाल लिखती हैं.बेमिसाल .लाजवाब.

    मोहब्बत नामा
    मास्टर्स टेक टिप्स

    जवाब देंहटाएं
  13. मुक्त मन को पकड़ना ठीक नहीं ... उसकी उड़ान रोकना ठीक नहीं ... उसे मुक्त गगन में खोने दो ... सुन्दर रचना ...

    जवाब देंहटाएं
  14. रीना तुम्हारी कविता तो सुंदर होती ही है साथ ही प्रस्तुतीकरण भी अद्भुत होता है. सुंदर प्रस्तुति.

    जवाब देंहटाएं
  15. मन कभी पुरबाई है तो कभी पंछी तो कभी पानी
    जो कभी स्थिर नहीं रहता ....
    सुंदर रचना ...
    बधाई !!

    जवाब देंहटाएं
  16. अच्छी.... भावपूर्ण रचनाएँ हैं रीना जी....बधाई!

    जवाब देंहटाएं
  17. समसामयिक रचना बहुत उम्दा लिखी है आपने।

    जवाब देंहटाएं
  18. मन को छो गई आपके मन कि पुरवाई..... बहुत खूब रीना जी!

    जवाब देंहटाएं
  19. बह गया तो फिर हाथ नहीं आयेगा
    मन जा के समुंदर में मिल जायेगा ।

    सुंदर भाव !!

    जवाब देंहटाएं
  20. प्यारी सी मनमोहक प्रस्तुति..

    जवाब देंहटाएं
  21. जबरदस्ती बैठा दो जमीन पर
    तो मन पानी की तरह बहे
    मेरा बहता मन
    कभी ना रुके ...
    क्‍या बात है ... भावमय करते शब्‍दों का संगम

    जवाब देंहटाएं
  22. बहुत ही सुन्दर रीना जी, बढ़िया प्रस्तुति है ये. मन अगर काबू में आ जाये तो जिंदगी से उमंग ही ख़तम हो जाएगी..फिर जीने के मायने ही बदल जायेंगे. उड़ने दिए इसे अपनी उड़ान पर.
    --अवनीश मौर्य--

    जवाब देंहटाएं
  23. शीतलता लाती है
    पुरवाई मेरे मन की
    देखो क्या - क्या करती है
    प्रोत्साहन देती पंक्तियाँ ...... बहुत बढिया रचना

    जवाब देंहटाएं
  24. बेहतरीन....
    निखरता जा रहा है लेखन आपका....
    शुभकामनाएं......

    जवाब देंहटाएं
  25. दोनों ही सुन्दर

    जवाब देंहटाएं
  26. purvai man ki sunder laybadhdh rachna
    dono rachnayein achhi hain
    shubhkamnyen

    जवाब देंहटाएं

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