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शनिवार, 7 जुलाई 2012
शुक्रवार, 29 जून 2012
Shayad Mai Chhal Rahi Hu Khud Ko Aur Tumhe Bhi शायद मैं छल रही हूँ खुद को और तुम्हें भी
शायद मैं छल रही हूँ खुद को और तुम्हें भी ....
क्यूँ बेचैन है दिल तुम्हारे लिए
तुम जो बहुत दूर हो मुझसे...
शायद || तुम तक पहुँचना भी
मेरे लिए मुमकिन नहीं
फिर क्यूँ आहत होता है दिल
तुम्हारे दूर जाने की बातों से
तुम कब थे ही मेरे पास
या तुम्हारा अहसास ही है मेरे लिए खास...
जो हमारे बीच के फासलों को कम करता है
और हमें जोड़े रखता है एक दूजे से...
पर ये जुड़ाव भी कैसा....
जो कभी हकीकत नहीं बन सकता...
मै जानती हूँ और मानती भी हूँ
पर फिर भी कहती रहती हूँ
की,, मै तुमसे प्यार करती हूँ
और शायद..मेरा यही प्यार
तुम्हारे लिए बंदिश होता जा रहा है...
जो तुम्हें आगे बढ़ने से रोकता है ...
ना तुम मेरे हो सकते हो
ना मै तुम्हारी
शायद मैं छल रही हूँ खुद को और तुम्हें भी ....
मुझे जाना कहीं और है
मेरे हाथों में किसी और का हाथ होगा एकदिन
पर जिंदगीभर मैं तुम्हें साथ पाना चाहती हूँ
ये कैसे मुमकिन होगा तुम्हारे लिए...
मुझे कहीं और देखना
पर मेरा ये स्वार्थी प्यार
हर मोड़ पर तुम्हें साथ पाना चाहता है...
शायद मैं छल रही हूँ खुद को और तुम्हें भी ....
प्यार जो फासलों में जीता है...
टीस है ये दर्द की
आह है ये जुदाई की....
गुरुवार, 21 जून 2012
Mujhe Kavita Bana Diya Usane मुझे कविता बना दीया उसने
कैसा बाँवरा था वो कविताओं का इतना शौक रखता था नाम रीना है मेरा कविता बना दिया उसने... प्रेम बसाये आँखों में जब भी देखती हूँ उसे समझाना कुछ और चाहती हूँ पर देखो बाँवरे ने क्या समझा छोटी सी आँखों में मेरे झील और समुंदर भरकर कविता बना दिया उसने..... जब भी उससे कुछ कहती हूँ सुनता नहीं वो शब्द मेरे खुलते -बंद होते ..... होंठो को देखा गुलाब की पंखुड़ियों का नाम देकर कविता बना दिया उसने.... सोचा चूड़ियाँ झनकाऊं बिंदिया चमकाऊं थोड़ा उनका मन बहकाऊं बाँवरे ने मुझको ही बहका दिया चूड़ियों की झंकार सूनी सुना ना मेरे दिल की धड़कन बिंदिया को चंदा -सूरज की उपमा दे दी और मुझको कविता बना दिया उसने.. उस नादान की नादानी से उदास जब हो जाती हूँ बंधे केशुवों को खोलकर उदास चेहरा जब छुपाती हूँ काली घटा ,बादल , रेशम जाने क्या - क्या नाम देकर मेरे केशुवों पर कविता बना दिया उसने.. मुझे कविता बना दिया उसने... मुझे कविता बना दिया उसने... |
मंगलवार, 12 जून 2012
Jan Dena Yah Vikalp Kitana Sahi Hai जान देना यह विकल्प कितना सही है???
बचपन से किताबों में पढ़ते
और
लोगों से सुनते आए हैं
"जीवन संघर्ष है "
"मेहनत करने से सफलता मिलती है"
फिर क्यूँ
इस संघर्ष से डरकर
अपना जीवन बर्बाद किया
परीक्षा में फेल हुए
या कम अंक आए तो क्या हुआ...
जीवन का क्यूँ विनाश किया
एक साल की तो बात थी
मेहनत करते तो
फिर सफल हो ही जाते
एक साल के लिए
क्यूँ तुमने अपना पूरा
जीवन बर्बाद किया....
जान देना यह विकल्प
कितना सही था
या परिश्रम करना
तुम्हे रास नहीं था
किस बात की चिंता थी तुम्हें
एक साल पीछे हो गए
लोग हसेंगे
या माता पिता गुस्सा होंगे
इस बात का डर था
मृत्यु को अपनाने से अच्छा
थोड़ा हौसला और दिखाते...
परिश्रम करते
सफल हो जाते...
हँसनेवाले हँसते रह जाते....
जीवन तो बर्बाद न होता..
तेज कदम बढ़ाते..
तो आगे भी बढ़ जाते..
फिर सर उठा कर
चलते...
माता पिता भी खुश हो जाते...
उज्ज्वल भविष्य को ख़त्म
कर मृत्यु की तुमने
क्यूँ राह अपनाई ......
जान देना यह विकल्प
कितना सही था.....
या परिश्रम करना
तुम्हे रास नहीं था ...
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