Followers

Monday, September 5, 2011

Ek Gulab Ka Ful Bani Mai एक गुलाब का फुल बनी मै


ताजा ताजा नई खिली थी 
तब सबने मुझे मान दिया
कभी भगवान के चरणों पर ,
कभी स्नेही ने बालो में स्थान दिया
कभी प्रेम, कभी दर्द 
कभी जुदाई तो कभी बिदाई  की साक्झ बनी मै
काँटों के गोद में पली - बढ़ी 
एक गुलाब का फुल बनी मै

4 comments:

  1. बहुत ही सुंदर .... एक एक पंक्तियों ने मन को छू लिया ...

    ReplyDelete
  2. gulab ke ful ki kahani kavita me
    bahut hi sundar

    ReplyDelete
  3. बहुत बढ़िया लिखा है आपने

    ReplyDelete
  4. आपने सुन्दर जज्बात प्रस्तुत किये हैं.
    कोमल कोमल,मधुर मधुर.

    ReplyDelete

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...