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शनिवार, 12 जनवरी 2013

Ek jashn aisa bhi एक जश्न ऐसा भी ..



आज मैंने देखा सड़क पर 

एक नन्हा सांवला बच्चा 

प्यारा सा,, खाने की थाली में कुछ ढूंढ़ता हुआ

उस थाली में था भी तो ढ़ेर सारा पकवान .....

वहीँ पास उसकी बहन थी
जो एक सुन्दर से दिए के
साथ खेल रही थी .....
दिए की रोशनी से उसकी आँखे चमचमा रहीं थी
वो छोटी सी झोपड़ी भी दिए के
रोशनी से रोशन हो गयी थी...
वरना दूर सड़क पर की स्ट्रीट लाइट 
का सहारा तो था ही...
बगल में बैठी उसकी माँ 
अपने बच्चों की ख़ुशी से
फूली नहीं समां रही थी...
थोड़ी ही दूर अगले मोड़ पर एक दावत थी..
सेठ जी के  पोते का मुंडन था...
शायद वहां के सेठ-या सेठानी 
इनपर मेहरबान हुए होंगे
तभी तो आज यहाँ भी जश्न का माहौल है...
शायद जब महलों में दिया जलता है
तभी होती है इन झोपड़ियों में रोशनी ....


45 टिप्‍पणियां:

  1. उनकी आँखें दीयों से कम नहीं ....

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  2. अमीरी गरीबी की झलक दिखाती एक मार्मिक प्रस्तुती। पर एक बात तो कहना चाहूँगा 'आमिर और गरीब का फर्क कितना नगण्य है,एक ही दिन की भूख और एक ही घंटे की प्यास दोनों को समान बना देती है।"

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  3. ह्म्‍म्म्म.... शायद... ऐसा ही हो...! दुख होता है मगर...है ना !
    ~सादर!!!

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  4. तभी होती है
    इन झोपड़ियों में रोशनी ....
    और मनाते हैं
    ये जश्न
    दिवाली सा

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (13-12-2013) को (मोटे अनाज हमेशा अच्छे) चर्चा मंच-1123 पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  6. सुन्दर प्रस्तुति |
    बढ़िया विषय |
    शुभकामनायें आदरेया ||

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  7. "जब महलों में दिया जलता है
    तभी होती है इन झोपड़ियों में रोशनी ...."


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  8. aapne sahi likha kyonki unki kushi ko sirph ve hi mahsus kar sakte hain........

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  9. हकीकत तो यही है. सशक्त अभिव्यक्ति.

    रामराम.

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  10. सुन्दर रचना. महलें की "रौशनी" की वजह और महलें ही घोर अधकार की भी. कड़वा सच.

    जवाब देंहटाएं
  11. समाज में पल रही विषमता को रेखांकित करती रचना -साधु!

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  12. मार्मिक अभिव्यक्ति, सुंदर प्रस्तुति.


    लोहड़ी, मकर संक्रांति और माघ बिहू की शुभकामनायें.

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  13. समाज की विडंबना है झोंपड़े में दिए महलों की रोशन होने पे ही होते हैं ...
    प्रभावी लिखा है बहुत ...

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  14. गरीब की ख़ुशी का आपने सुन्दर नक्षा खींचा है। काश की गरीबों को ऐसी खुशियाँ रोज मिलती रहें।

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  15. शायद जब महलों में दिया जलता है
    तभी होती है इन झोपड़ियों में रोशनी ....

    मार्मिक अभिव्यक्ति ....
    मकरसंक्रांति की शुभकामनाएँ !

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  16. बहुत खुबसूरत भावों की लडियां

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  17. दिल को छू लेने वाली अभिवयक्ति | अक्सर इनके साथ ऐसा होते देखा है |

    Hindi Tips : आप भी दिखाएं Stroked Text Effect अपने ब्लॉग पर बिना फोटोशाप के |

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  18. मार्मिक रचना ...लोहिड़ी व मकर संक्रांति पर्व की ढेरों शुभकामनाएँ

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  19. महलों के दिये तो रोज ही रोशन हैं । कभी कभी ईश्वर झोपडों पर भी मेहेरबान हो जाता है ।
    सुंदर भावस्पर्शी रचना ।

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  20. शायद जब महलों में दिया जलता है
    तभी होती है इन झोपड़ियों में रोशनी ....

    ...कटु सत्य...काश हर झोंपड़ी अपने दिये से रोशन होती...बहुत प्रभावी रचना..

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  21. बहुत सही कहती कहानी रीना जी |मकर संक्रांति पर आपको भी हार्दिक शुभकामनाएं |
    आशा

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  22. वाह !सुंदर पंक्तियाँ
    शायद जब महलों में दिया जलता है
    तभी होती है इन झोपड़ियों में रोशनी ..

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  23. बहुत मार्मिक प्रस्तुति ...

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  24. मन को छूती पोस्‍ट ... हकीकत बयां करती हुई

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  25. बहुत ही अच्छी लेखनी बहुत ही सुन्दर कविता |रीना जी आभार

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  26. बहुत सुन्दर कविता लिखी आपने...मार्मिक प्रस्तुति

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  27. शुक्रिया आपकी सद्य टिपण्णी का .मार्मिक प्रासंगिक .

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  28. मार्मिक प्रस्तुति कड़वा सच
    थोड़ी ही दूर अगले मोड़ पर एक दावत थी..
    सेठ जी के पोते का मुंडन था...
    शायद वहां के सेठ-या सेठानी
    इनपर मेहरबान हुए होंगे
    तभी तो आज यहाँ भी जश्न का माहौल है...
    शायद जब महलों में दिया जलता है
    तभी होती है इन झोपड़ियों में रोशनी ....

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  29. आपकी इस रचना को कविता मंच पर साँझा किया गया है

    संजय भास्कर
    कविता मंच
    http://kavita-manch.blogspot.in

    जवाब देंहटाएं

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