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सोमवार, 30 अप्रैल 2012

Uljhan उलझन.....

( लिजिए आ गयी हूँ मैं अपनी उलझन लेकर )



जब भी बढ़ते है कदम ऊँचाई की ओर 
रिश्तों की डोर ढ़ीली हो जाती है 
जिनसे उम्मीद हो साथ निभाने का 
ना जाने क्यों उनसे ही दुरी हो जाती है 
सच कामयाबी देती है- कुछ 
पर लेती है- बहुत कुछ 
जब भी चढ़ती हु एक सीढ़ी 
मंजिल की तरफ हाथ बढाती ही हूँ की,,,
अपनों का हाथ छुटता जाता है
समझ में फेर है उनके 
या मेरी ही कहीं गलती है
कुछ पाने की चाह थी 
बस इतनी सी तो आस थी 
या यही मेरी गलती है.....
तुम क्यों ना समझ पाए मेरी ख्वाहिशे 
मेरी आशाये .....,मेरी मंजिले....,,,
हमराह बनने की बजाय क्यों गुमराह हुए तुम 
कैसी ये उलझन है मंजिले भी अपनी है..
रिश्ता भी अपना......
 किसे समझे किसे समझाए ...
 उलझन.....



s4u

35 टिप्‍पणियां:

  1. कैसी ये उलझन है मंजिले भी अपनी है..
    रिश्ता भी अपना......
    किसे समझे किसे समझाए ...
    उलझन.....

    बहुत सुंदर प्रस्तुति,..बेहतरीन पोस्ट

    MY RESENT POST .....आगे कोई मोड नही ....

    जवाब देंहटाएं
  2. कैसी ये उलझन है मंजिले भी अपनी है..
    रिश्ता भी अपना......
    किसे समझे किसे समझाए ...
    .

    यूं तो उहापोह में न आयें
    उलझे बिना तो न सुलझाएं
    बहुत सुन्दर रचना

    जवाब देंहटाएं
  3. जब भी बढ़ते है कदम ऊँचाई की ओर
    रिश्तों की डोर ढ़ीली हो जाती है
    जिनसे उम्मीद हो साथ निभाने का
    ना जाने क्यों उनसे ही दुरी हो जाती है
    khubsurat lines ke sath khubsurat bhawon ka khubsurat sanyojan kawita ki khubasurati men char chand lagata hai .kyon kahun achchhi lagi jalan si hoti hai .

    जवाब देंहटाएं
  4. तुम क्यों ना समझ पाए मेरी ख्वाहिशे
    मेरी आशाये .....,मेरी मंजिले....,,,
    हमराह बनने की बजाय क्यों गुमराह हुए तुम
    कैसी ये उलझन है मंजिले भी अपनी है..

    बहुत सुंदर भाव्याभिव्यक्ति. बधाई.

    जवाब देंहटाएं
  5. किसे समझे किसे समझाए ...
    उलझन.....bahut hi rachnatmkata se kavy ko smapt kiya hai.... bahut khoob reena ji..!!!

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  6. इन उलझनों से निकल कर ही सही रास्ता को पाया जा सकता है।

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  7. उलझनों को सुलझाना ही जीवन हैं .....

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  8. मन की उलझन ...दर्शाती ...बहुत सुंदर रचना ....!!
    शुभकामनायें ....

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  9. कामयाबी देती है- कुछ
    पर लेती है- बहुत कुछ
    जब भी चढ़ती हु एक सीढ़ी
    मंजिल की तरफ हाथ बढाती ही हूँ की,,,
    अपनों का हाथ छुटता जाता है
    कामयाबी का खुला मुंह सुरसा की तरह सबकुछ निगलता जा रहा है

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  10. उलझनों को सुलझाते रहने का नाम जिंदगी है।
    बढि़या कविता।

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  11. जिंदगी अक्सर ऐसे ही दोराहों पर खड़ा कर देती है जब किसी एक को चुनना होता है ऐसे में समर्पण करे ईश्वर को और उसे चुनने दे वो हमेशा आपके लिए अच्छा ही चुनता है चाहे वो आपको शुरू में ख़राब लगे पर अंत में वही अच्छा होगा ।

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  12. कामयाबी देती है- कुछ
    पर लेती है- बहुत कुछ
    जब भी चढ़ती हु एक सीढ़ी
    मंजिल की तरफ हाथ बढाती ही हूँ की,,,
    अपनों का हाथ छुटता जाता है.....sahi kaha....

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  13. पांव जमीन पर रख कर उचाई छूने की कोशिश ...कुछ भी खोने नही देगी !

    जवाब देंहटाएं
  14. बहुत ही सारगर्भित रचना । मेरे पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  15. बहुत सुंदर भावाव्यक्ति ,बधाई

    जवाब देंहटाएं
  16. पूरी जिंदगी हमें ऐसी ही उलझनों को सुलझाते रहना होता है!!

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  17. ऐसी उहापोह भी आती है जीवन में.....

    जवाब देंहटाएं
  18. कामयाबी देती है- कुछ
    पर लेती है- बहुत कुछ
    जब भी चढ़ती हु एक सीढ़ी
    मंजिल की तरफ हाथ बढाती ही हूँ की,,,
    अपनों का हाथ छुटता जाता है..
    बिल्‍कुल सटीक बात कहती हुई पंक्तियां ।

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  19. बहुत सुंदर भावाव्यक्ति ....

    जवाब देंहटाएं
  20. कैसी ये उलझन है मंजिले भी अपनी है..
    रिश्ता भी अपना......
    किसे समझे किसे समझाए ...
    उलझन.....

    .....कहाँ निकल पाते हैं इन उलझनों से बाहर उम्र भर..बेहतरीन प्रस्तुति..

    जवाब देंहटाएं
  21. जब भी बढ़ते है कदम ऊँचाई की ओर
    रिश्तों की डोर ढ़ीली हो जाती है
    मैं भी पूरी तरह सहमत हूँ ...सुन्दर काव्य

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  22. Good poetic expression .Expectaions neither die nor gets fulfilled .Life marches forward .

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  23. जब भी बढ़ते है कदम ऊँचाई की ओर
    रिश्तों की डोर ढ़ीली हो जाती है
    जिनसे उम्मीद हो साथ निभाने का
    ना जाने क्यों उनसे ही दुरी हो जाती है


    जीवित अहसास....गो तल्ख है पर यथार्थ है..

    और शायद इसलिये ही यह इसरार कि जरा तस्वीर से तू निकलकर सामने आ...

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  24. कृपया मेरे ब्लॉग पर भी आए

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  25. रिश्तों की डोर ही कुछ ऐसी होती है ... बड़ी बारीके से सहेजनी होती है ... अपनों के साथ और कामयाबी के बीच ...

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  26. bahut hi sach likha hai aapne.kuchh paane ke liye apna bahut kuchh khona padta hai.
    fir kadam na aage badh paate hain na peechhe.vikat samasya------
    poonam

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  27. बहुत सुन्दर प्रस्तुती।
    इस तरह से रचना लिखना सबके बस की बात नही,
    ना जाने कितने जज्बात जमा होकर लिख जाते हैं।

    मोहब्बत नामा
    मास्टर्स टेक टिप्स

    जवाब देंहटाएं

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