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गुरुवार, 13 अक्टूबर 2011
रविवार, 9 अक्टूबर 2011
Intjar इंतजार
कब आएगा वो सुरज
जो जीवन में उजाला लाए
कब आएगा वो दिन
जो मेरे हर पल को चमकाये
कब आएगी वो संध्या
जो मन शीतल कर जाए
कब आएगी वो तारो से सजी रात
जो मेरे जीवन को भी सजाये
कब आएगी वो घडी
जो जीवन में रफ्तार लाए
कब आएगी वो सडक
जो मुझे मंजिल तक पहूचाये
इंतजार है मुझे हर उस मौके का
इंतजार है मुझे हर उस लम्हे का
इंतजार है मुझे उस हर एक पल का
मेरे हर इंतजार में एक विश्वास है
उस विश्वास पर मुझे ऐतबार है
ऐतबार -ए-शमा कि लौ यु हि जलाउंगी
मंजिल को पाने का अथक प्रयास करती जाऊंगी
सोमवार, 3 अक्टूबर 2011
रविवार, 2 अक्टूबर 2011
Ahimsa अहिंसा

हिंसा फैलाये अशांति , करे भंग देश की शांति ,
क्यों करते हो ऐसे कम,
बनो अहिंसात्मक और कर जाओ विश्व में ,
अपना प्रसिद्ध नाम ,
गाँधी जी थे अहिंसात्मक, आज नोटों पर छपी है उनकी तस्वीर ,
ए मनुष्य ,...
तुम भी कुछ ऐसा कर जाओ ,
हो जाओ जग में प्रसिद्ध,
हिंसा मन की कामना को बढ़ाये,
तुम्हे पाप के दलदल में फ़साये ,
बुद्धि तो तुमने भी पाई ,
या जब बुद्धि बाँट रहा था खुदा ,तुम गए थे गाय चराई,
ए मनुष्य ,,,
बनो अहिंसात्मक और कर जाओ विश्व में ,
अपना प्रसिद्ध नाम ,
गाँधी जी थे अहिंसात्मक, आज नोटों पर छपी है उनकी तस्वीर ,
ए मनुष्य ,...
तुम भी कुछ ऐसा कर जाओ ,
हो जाओ जग में प्रसिद्ध,
हिंसा मन की कामना को बढ़ाये,
तुम्हे पाप के दलदल में फ़साये ,
बुद्धि तो तुमने भी पाई ,
या जब बुद्धि बाँट रहा था खुदा ,तुम गए थे गाय चराई,
ए मनुष्य ,,,
अपनी आँखों से हिंसा का काला चस्मा उतार,
देख,,,
देख ,,,,,
देख,,,
देख ,,,,,
विशव में कितने काम पड़े है ,
फिर क्यों तुने हिंसा की राह अपनाई ,
हमारे पूर्वज , नेता और पिता ने क्या कम प्रताड़नाए सही थी ,
जो छोटी सी घाव में तुने इतनी उत्पात मचाई ,
ए मनुष्य ,...
छोड़ ये उंच - नीच, भेद - भाव , लडाई - झगडा , मार - काट,
जिले तू उस चमकते सूरज की तरह ,
और छुले वो ऊँचा - नीला आकाश ,
जी कर भी तू जिया नहीं,
कुछ नेक काम तू किया नहीं ,
ए मनुष्य ,...
काम कर तू ऐसा की
मरकर भी तू जीता रहे ,
लोगो के दिल में अमर रहे ,
कर तू कोई नेक काम ,और कर जा विश्व में अपना प्रसिद्ध नाम .......
फिर क्यों तुने हिंसा की राह अपनाई ,
हमारे पूर्वज , नेता और पिता ने क्या कम प्रताड़नाए सही थी ,
जो छोटी सी घाव में तुने इतनी उत्पात मचाई ,
ए मनुष्य ,...
छोड़ ये उंच - नीच, भेद - भाव , लडाई - झगडा , मार - काट,
जिले तू उस चमकते सूरज की तरह ,
और छुले वो ऊँचा - नीला आकाश ,
जी कर भी तू जिया नहीं,
कुछ नेक काम तू किया नहीं ,
ए मनुष्य ,...
काम कर तू ऐसा की
मरकर भी तू जीता रहे ,
लोगो के दिल में अमर रहे ,
कर तू कोई नेक काम ,और कर जा विश्व में अपना प्रसिद्ध नाम .......
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