|
आज मैंने देखा सड़क पर
एक नन्हा सांवला बच्चा
प्यारा सा,, खाने की थाली में कुछ ढूंढ़ता हुआ
उस थाली में था भी तो ढ़ेर सारा पकवान .....
वहीँ पास उसकी बहन थी
जो एक सुन्दर से दिए के
साथ खेल रही थी .....
दिए की रोशनी से उसकी आँखे चमचमा रहीं थी
वो छोटी सी झोपड़ी भी दिए के
रोशनी से रोशन हो गयी थी...
वरना दूर सड़क पर की स्ट्रीट लाइट
का सहारा तो था ही...
बगल में बैठी उसकी माँ
अपने बच्चों की ख़ुशी से
फूली नहीं समां रही थी...
थोड़ी ही दूर अगले मोड़ पर एक दावत थी..
सेठ जी के पोते का मुंडन था...
शायद वहां के सेठ-या सेठानी
इनपर मेहरबान हुए होंगे
तभी तो आज यहाँ भी जश्न का माहौल है...
शायद जब महलों में दिया जलता है
तभी होती है इन झोपड़ियों में रोशनी ....
|
poem,poem for children,current article,article about children,hindi poem ,story, short story,hindi quote,short quote,hindi short quote,love quote,hate quote,hindi poem
शनिवार, 12 जनवरी 2013
Ek jashn aisa bhi एक जश्न ऐसा भी ..
शनिवार, 5 जनवरी 2013
Galat rasta a short story गलत रास्ता
गलत रास्ता a short story...
मद्धम परीवार में जन्मा नमन, अशोक और सुमन का बेटा है..
छोटा परीवार माता -पिता छोटी बहन सिया और नमन...." हम दो हमारे दो" और "छोटा परीवार सुखी परीवार" वाली स्थिति थी यहाँ...
नमन बी.एस.सी कर रहा था .ज्यादा नहीं पर शुरू से ही प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हो जाता है..सिया भी प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हो जाती..माता पिता भी खुश थे. बच्चों पर अधिक दबाव नहीं डालते.प्यार से उन्हें समझाते है..
नमन बी.एस.सी द्वितीय वर्ष में आ गया ..अब यहाँ वहां के दोस्तों के साथ उसकी उठक- बैठक कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगी..
माता -पिता की हिदायते जैसे अब उसे रोक-टोक लगने लगी ..ज्यादा समय घर के बाहर रहना...बदनसीबी यहाँ हो गयी की उसके , उन दोस्तों में वह ज्यादा पढ़ा था..बाकि सब कम पढ़े थे.. उसके दोस्त उसकी छोटी -छोटी बात पर तारीफ करने लगे..क्योंकि उनके लिए क.ख ग घ से ज्याद तो पहाड़ जैसा था..
उनके झांसे में आकर नमन काफी-काफी देर तक घर से बाहर रहने लगा...उसके दोस्त उससे अपना काम निकलवाते फिर पेट भर नमन की तारीफ कर देते..नमन फुला नहीं समाता और घर आकर जब अपने माँ -पिता से यह बताता है तो उसके पिता उसे समझाते है की , तुम अपनी बराबरी,, अपने से ज्यादा पढ़े -लिखे के साथ करो तब तुम्हें पता चलेगा की,तुम्हें अभी बहुत -कुछ सीखना है.. पर नमन कहाँ माननेवाला था उसे लगता की उसके माता-पिता उसे नीचा दिखाना चाहते है..इसलिए ऐसा बोल रहे है..
कुछ दिन के बाद नमन का रिजल्ट आया जिसमे वह दो विषयों में फेल हो गया ..तभी भी उसके पापा ने उसे प्यार से समझाया पर कोई फायदा ना हुआ.. उलट वह अपने दोस्तों के साथ और समय बिताने लगा
उसमें से कुछ सिगरेट और दारू पीनेवाले लोग भी थे जो घर से लड़ - झगड़ कर पैसे ले आते...नमन दारू और सिगरेट तो नहीं पिता था पर अपने उन दोस्तों के साथ बैठा रहता था...उसके दोस्तों को उसकी ये बात अच्छी नहीं लगती थी...दोस्तों ने उसे फ़साने की साजिश की ..वे मजाक के बहाने उसपर कभी दारू झिड़क देते तो कभी सिगरेट के धुवें उड़ा देते..
जब वह घर जाता तो उसके कपड़ों से दारू और सिगरेट की बदबू आती...माता - पिता जब सवाल पूछते तो नमन कहता मैं तो सिर्फ वहां खड़ा था ...नमन की बात तो सही थी... पर बेटे के कपड़ो से जो बदबू आ रही है और उसके बदलते रवैय्ये के कारण वे उसपर विश्वास भी नहीं कर पा रहे थे..." वो कहते है न अगर आप किसी गलत इन्सान के साथ खड़े भी है तो भी आप भी शक के घेरे में आ जायेंगे."..यही स्थिति यहाँ भी थी...माता - पिता को लगता है की उनका बेटा बिगड़ गया है...और बेटे को लगता है की उसके माता-पिता उसपर शक करते हैं....
सिख...
१) किसी के बहकावे में न आये...माता-पिता से बड़ा हितैषी बच्चों के लिए और कोई नहीं होता...
२) प्रसंशा अपनी जगह ठीक है पर उज्जवल भविष्य के लिए शिक्षा जरुरी है...
३) आप भले ही बहुत अच्छे हो पर यदि आप गलत व्यक्ति के साथ खड़े हैं .. तो आप भी शक के घेरे में आ सकते हो...
कम पढ़े लिखे से कोई गलत मतलब नहीं है मेरा..हर बात के कई पहलू हो सकते है..जिनमे एक यह भी है....
मद्धम परीवार में जन्मा नमन, अशोक और सुमन का बेटा है..
छोटा परीवार माता -पिता छोटी बहन सिया और नमन...." हम दो हमारे दो" और "छोटा परीवार सुखी परीवार" वाली स्थिति थी यहाँ...
नमन बी.एस.सी कर रहा था .ज्यादा नहीं पर शुरू से ही प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हो जाता है..सिया भी प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हो जाती..माता पिता भी खुश थे. बच्चों पर अधिक दबाव नहीं डालते.प्यार से उन्हें समझाते है..
नमन बी.एस.सी द्वितीय वर्ष में आ गया ..अब यहाँ वहां के दोस्तों के साथ उसकी उठक- बैठक कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगी..
माता -पिता की हिदायते जैसे अब उसे रोक-टोक लगने लगी ..ज्यादा समय घर के बाहर रहना...बदनसीबी यहाँ हो गयी की उसके , उन दोस्तों में वह ज्यादा पढ़ा था..बाकि सब कम पढ़े थे.. उसके दोस्त उसकी छोटी -छोटी बात पर तारीफ करने लगे..क्योंकि उनके लिए क.ख ग घ से ज्याद तो पहाड़ जैसा था..
उनके झांसे में आकर नमन काफी-काफी देर तक घर से बाहर रहने लगा...उसके दोस्त उससे अपना काम निकलवाते फिर पेट भर नमन की तारीफ कर देते..नमन फुला नहीं समाता और घर आकर जब अपने माँ -पिता से यह बताता है तो उसके पिता उसे समझाते है की , तुम अपनी बराबरी,, अपने से ज्यादा पढ़े -लिखे के साथ करो तब तुम्हें पता चलेगा की,तुम्हें अभी बहुत -कुछ सीखना है.. पर नमन कहाँ माननेवाला था उसे लगता की उसके माता-पिता उसे नीचा दिखाना चाहते है..इसलिए ऐसा बोल रहे है..
कुछ दिन के बाद नमन का रिजल्ट आया जिसमे वह दो विषयों में फेल हो गया ..तभी भी उसके पापा ने उसे प्यार से समझाया पर कोई फायदा ना हुआ.. उलट वह अपने दोस्तों के साथ और समय बिताने लगा
उसमें से कुछ सिगरेट और दारू पीनेवाले लोग भी थे जो घर से लड़ - झगड़ कर पैसे ले आते...नमन दारू और सिगरेट तो नहीं पिता था पर अपने उन दोस्तों के साथ बैठा रहता था...उसके दोस्तों को उसकी ये बात अच्छी नहीं लगती थी...दोस्तों ने उसे फ़साने की साजिश की ..वे मजाक के बहाने उसपर कभी दारू झिड़क देते तो कभी सिगरेट के धुवें उड़ा देते..
जब वह घर जाता तो उसके कपड़ों से दारू और सिगरेट की बदबू आती...माता - पिता जब सवाल पूछते तो नमन कहता मैं तो सिर्फ वहां खड़ा था ...नमन की बात तो सही थी... पर बेटे के कपड़ो से जो बदबू आ रही है और उसके बदलते रवैय्ये के कारण वे उसपर विश्वास भी नहीं कर पा रहे थे..." वो कहते है न अगर आप किसी गलत इन्सान के साथ खड़े भी है तो भी आप भी शक के घेरे में आ जायेंगे."..यही स्थिति यहाँ भी थी...माता - पिता को लगता है की उनका बेटा बिगड़ गया है...और बेटे को लगता है की उसके माता-पिता उसपर शक करते हैं....
सिख...
१) किसी के बहकावे में न आये...माता-पिता से बड़ा हितैषी बच्चों के लिए और कोई नहीं होता...
२) प्रसंशा अपनी जगह ठीक है पर उज्जवल भविष्य के लिए शिक्षा जरुरी है...
३) आप भले ही बहुत अच्छे हो पर यदि आप गलत व्यक्ति के साथ खड़े हैं .. तो आप भी शक के घेरे में आ सकते हो...
कम पढ़े लिखे से कोई गलत मतलब नहीं है मेरा..हर बात के कई पहलू हो सकते है..जिनमे एक यह भी है....
सोमवार, 31 दिसंबर 2012
Nav Varsh ki shubhkamnayen नववर्ष की शुभकामनाएँ...
|
शुभ वंदन करे हम हे गणराज ...
शुभता ही शुभता ले आओ
आप हम सबके द्वार...
मंगलमय हो नववर्ष सभी का
दो ऐसा वरदान....
तन मन शुद्ध हो सभी का
रोगों का हो विनाश...
शुभकामना ये मेरी है
मंगलमय हो सब संसार
शिक्षा ,उन्नति,प्रगति मिले
मिले सभी को ढ़ेर सारा ज्ञान ....
पाप दूर हो सभी के मन से
सभी रहे प्यार से
रखे एक-दूजे का मान...
शुभ वंदन करे हम हे गणराज ...
शुभता ही शुभता ले आओ
आप हम सबके द्वार...
|
शनिवार, 22 दिसंबर 2012
Ek Boond Ishq एक बूंद इश्क
|
होंठो की खामोशी ने पलकों के
भीतर आँखों के कोर में
एक बूंद इश्क बना दिया .....
आँखों को ठंडक देते उस
एक बूंद इश्क ने सब कुछ
धुंधला सा कर दिया .....
उस धुंधलपन को साफ करने के लिए
जैसे ही पलकें झपकाई ...
वो एक बूंद इश्क आँखों से बहकर
गालों पर से ढुलकते हुए
धीरे से ना जाने कहाँ खो गया.......
जहाँ से वो एक बूंद इश्क गुजरा
वहां अब सिर्फ एक गीलेपन की रेखा है
कुछ वक्त में वो भी सुख जाएगी...
फिर उदास चेहरे ......
बुझे मन....
ठंडी आँखोंवाले चेहरे पर रह जाएगी
एक दिखावटी मुस्कान.....
अपने अपनों के लिए....
और मन में एक आस...
प्रेमसागर को पाने की... |
सदस्यता लें
संदेश (Atom)


.gif)
