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मंगलवार, 23 जुलाई 2019

chhata - छाता - बालकविता

     छाता☔️☔️☔️⛈️⛈️


मुझको प्यारा मेरा छाता
ये बारिश से मुझे बचाता

नहीं कभी मै इसको भूलूँ
संग इसको लेकर मै घूमूँ

जब भी आती बरखा रानी
खूब बरसाती हमपर पानी

छाता हमें बचाता है
घर हमको पहुँचाता है

शनिवार, 6 अप्रैल 2019

chhoti -chhoti baten छोटी छोटी बातें



आजकल बहुत कमियाँ 
निकालने लगे हो तुम
सीधे -सीधे कह दो ना की
अब तुम्हें हमारी जरुरत नहीं 
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गम बहुत है जहाँ में 
पर आँसूओं से हासिल क्या 
जिंदगी को जीने के लिए 
मुस्कान की जरुरत है 
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नशा सिर्फ जाम से ही नहीं होता 
" घमंड " और " अहंकार " भी 
बहुत नशीले होते हैं 
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कुछ होने के लिए 
वजह की जरुरत नहीं होती
कभी बेवजह भी
बहुत कुछ हो जाता है 
जिससे आवाज आई 
सिर्फ वही नहीं टुटा है 
बिना आवाज किये भी 
बहुत कुछ टूट जाता है
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तुम दुआ बनकर 
मेरी जिंदगी में आना
और मै मुस्कान बनकर 
तुम्हारे होंठो पर बस जाऊँ
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बातों की मार 
घमंड 
शक 
और जलन 
कर देते है 
रिश्तों का
 दहन
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अकेले में तो 
दुश्मन भी 
हाँ में हाँ 
मिलाते हैं 
तुम अगर 
दोस्त हो तो 
महफ़िल में आओ 
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हाल-ए- मिजाज कुछ 
बदला -बदला सा है उनका 
जुबान कुछ और कह रही है 
मुस्कान कुछ और 
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ठोकर लगी है शीशे को 
इसलिए तो टुटा है
और लगी है बड़ी जोर से 
इसलिए तो इतना बिखरा है 
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रविवार, 31 मार्च 2019

jogan जोगन



जोगन का है रूप धरा 
जोगन तेरी कहलाऊँगी
और नहीं कुछ चाह है प्रियतम
भजन तेरे ही गाऊँगी
मन के मंदिर में मै अपने 
मूरत तेरी सजाऊँगी
मै तेरी दीवानी साँवरे
तुझे नैनन में बसाऊँगी
तुम मेरे भगवन हो कान्हा 
मै हूँ तेरी जोगनियाँ
दर्शन दे दो हे प्रभुवर 
मै तृप्त मन हो जाऊँगी
दर्शन को तेरे नैना तरसे 
तरस- तरस के नैना बरसे
मन भी अब विचलित है डर से
और अधिक ना करो विलंब
मै मीरा दीवानी तेरी
जोड़ी तुझसे प्रीत की डोरी 
अब और नहीं कुछ चाह है मेरी 
मिल जाये जो तेरा दर्शन 
8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8

मंगलवार, 24 अप्रैल 2018

Aakhir kab ? आखिर कब ?



आखिर क्यों
आखिर कबतक
यूँ बेआबरू
होती रहेंगी बेटीयाँ ?
कभी उनके कपड़ों पर
कभी उनकी आज़ादी पर 
सवाल उठते थे ?
पर मासूम बच्चियाँ
दुधमुही बच्चियाँ अब उनपर 
क्या और किस 
बात का दोषारोपण होगा ?
उनपर किस बात की 
उँगली उठेगी अब ?
क्यों नहीं ऊँगली उठती
उन वैहशी नज़रों पर
उनकी कोढ़ी आत्मा पर
उनके मलिन मस्तिष्क पर
और कहाँ सोया है 
हमारा कानून
क्यों नहीं बनाता 
कोई मिसाल
की जुल्म के बारे में
सोचकर ही काँप उठे 
उन बेदर्दों की आत्मा
और उड़ सके ये बेटीयाँ
बिना किसी डर के
अपनी उड़ान.. 
आखिर डर के साए
में कबतक जीना होगा ?
बेटियों को और उनके
परिवारजनों को 
फिर कैसे कोई 
बेटी बचाएँ और उन्हें पढ़ायेगा ?
कब देंगे हम बेटियों को यह विश्वास 
की वो है अब सुरक्षित ?
कब दे पाएँगे हम उन्हें 
खुला आसमान ??
आखिर कब ???



रीना मौर्य मुस्कान 
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