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Saturday, April 6, 2019

chhoti -chhoti baten छोटी छोटी बातें



आजकल बहुत कमियाँ 
निकालने लगे हो तुम
सीधे -सीधे कह दो ना की
अब तुम्हें हमारी जरुरत नहीं 
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गम बहुत है जहाँ में 
पर आँसूओं से हासिल क्या 
जिंदगी को जीने के लिए 
मुस्कान की जरुरत है 
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नशा सिर्फ जाम से ही नहीं होता 
" घमंड " और " अहंकार " भी 
बहुत नशीले होते हैं 
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कुछ होने के लिए 
वजह की जरुरत नहीं होती
कभी बेवजह भी
बहुत कुछ हो जाता है 
जिससे आवाज आई 
सिर्फ वही नहीं टुटा है 
बिना आवाज किये भी 
बहुत कुछ टूट जाता है
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तुम दुआ बनकर 
मेरी जिंदगी में आना
और मै मुस्कान बनकर 
तुम्हारे होंठो पर बस जाऊँ
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बातों की मार 
घमंड 
शक 
और जलन 
कर देते है 
रिश्तों का
 दहन
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अकेले में तो 
दुश्मन भी 
हाँ में हाँ 
मिलाते हैं 
तुम अगर 
दोस्त हो तो 
महफ़िल में आओ 
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हाल-ए- मिजाज कुछ 
बदला -बदला सा है उनका 
जुबान कुछ और कह रही है 
मुस्कान कुछ और 
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ठोकर लगी है शीशे को 
इसलिए तो टुटा है
और लगी है बड़ी जोर से 
इसलिए तो इतना बिखरा है 
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Sunday, March 31, 2019

jogan जोगन



जोगन का है रूप धरा 
जोगन तेरी कहलाऊँगी
और नहीं कुछ चाह है प्रियतम
भजन तेरे ही गाऊँगी
मन के मंदिर में मै अपने 
मूरत तेरी सजाऊँगी
मै तेरी दीवानी साँवरे
तुझे नैनन में बसाऊँगी
तुम मेरे भगवन हो कान्हा 
मै हूँ तेरी जोगनियाँ
दर्शन दे दो हे प्रभुवर 
मै तृप्त मन हो जाऊँगी
दर्शन को तेरे नैना तरसे 
तरस- तरस के नैना बरसे
मन भी अब विचलित है डर से
और अधिक ना करो विलंब
मै मीरा दीवानी तेरी
जोड़ी तुझसे प्रीत की डोरी 
अब और नहीं कुछ चाह है मेरी 
मिल जाये जो तेरा दर्शन 
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Tuesday, April 24, 2018

Aakhir kab ? आखिर कब ?



आखिर क्यों
आखिर कबतक
यूँ बेआबरू
होती रहेंगी बेटीयाँ ?
कभी उनके कपड़ों पर
कभी उनकी आज़ादी पर 
सवाल उठते थे ?
पर मासूम बच्चियाँ
दुधमुही बच्चियाँ अब उनपर 
क्या और किस 
बात का दोषारोपण होगा ?
उनपर किस बात की 
उँगली उठेगी अब ?
क्यों नहीं ऊँगली उठती
उन वैहशी नज़रों पर
उनकी कोढ़ी आत्मा पर
उनके मलिन मस्तिष्क पर
और कहाँ सोया है 
हमारा कानून
क्यों नहीं बनाता 
कोई मिसाल
की जुल्म के बारे में
सोचकर ही काँप उठे 
उन बेदर्दों की आत्मा
और उड़ सके ये बेटीयाँ
बिना किसी डर के
अपनी उड़ान.. 
आखिर डर के साए
में कबतक जीना होगा ?
बेटियों को और उनके
परिवारजनों को 
फिर कैसे कोई 
बेटी बचाएँ और उन्हें पढ़ायेगा ?
कब देंगे हम बेटियों को यह विश्वास 
की वो है अब सुरक्षित ?
कब दे पाएँगे हम उन्हें 
खुला आसमान ??
आखिर कब ???



रीना मौर्य मुस्कान 

Thursday, March 15, 2018

Astitv अस्तित्व





मेरा अस्तित्व मेरे साथ है 
वो किसी के नाम का मोहताज नहीं 
पर हाँ 
जब मेरे नाम के साथ 
मेरे पिता का नाम होता है 
मुझे ख़ुशी होती है
उनका मेरे साथ होना
उनका अहसास 
उनका आभास ....
और जब नाम के साथ
जुड़ता है पति का नाम 
तब भी नहीं खोता 
मेरा अस्तित्व 
ये तो बंधन है प्यार का 
मेरा स्त्री होना ही
मेरा अस्तित्व है 
और इस अस्तित्व से 
मैंने रचा है कई रिश्ता 
मेरे नाम के साथ किसी का नाम
या किसी के नाम के साथ मेरा नाम
ये कोई वजह नहीं 
अस्तित्व के होने न होने में
या अस्तित्व के खोने में
ये नाम तो हमें रिश्ते देते है
पर अस्तित्व की असली पहचान 
हमारा कर्म है 
हमारा लक्ष्य है
और एक स्त्री होना ही 
अपने आप में पूर्ण 
अस्तित्व है... 

रीना मौर्य मुस्कान 
मुंबई महाराष्ट्र  


Thursday, March 1, 2018

Rangbhari holi aai रंगभरी होली आई



रंग है उमंग है 
चारो ओर हुड़दंग है
मस्ती है प्यार है
रंगों की भरमार है
नीले, पिले, लाल, गुलाबी 
रंग सभी को भाते हैं
होली के त्यौहार मे
सबको गले लगाते हैं
गुजिया कचौरी की 
मीठी खुशबू
सबका मन ललचाते हैं 
भूल के सारे गिले और शिकवे 
हम हाथ से हाथ मिलाते हैं
प्रेम से होली मनाते हैं जी 
प्रेम से होली मनाते हैं |

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