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Wednesday, April 1, 2020

घर बैठे बोर ना हो क्रिएटीव बनें |




माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा अगले २१ दिनों तक लॉकडाउन का ऐलान कर दिया गया है जो कि कोरोना के संक्रमण की चेन को रोकने के लिए अति आवश्यक है |
     ऐसी स्थिति में सभी लोगों से नम्र  निवेदन है कि वे अपने - अपने घरों में रहकर अपना, अपने अपनों का तथा देश कि सुरक्षा में सहभागी हो | पर बहुत से लोग इतने अपील के बाद भी घर से निकलना बंद नहीं किये हैं|बोर होने का बहाना देकर यहाँ -वहाँ टहल रहें हैं | इसलिए आप घर बैठे बोर ना हो 
 क्रिएटीव बनें | अपने परिवार वालों को समय दें | अब बात आती हैं कि करें क्या ? तो घर के सभी सदस्य एक-दूसरे के कार्य में सहयोग देकर घर के कार्य से जल्दी निजात पा सकते हैं फिर सभी मिलकर आपसी बातचीत कर सकतें हैं | रसोईघर में कोई नया - नया पकवान बनाकर पूरा परिवार आनंद से खा सकता है| ऐसी स्थिति में घर कि महिला पर रसोईघर का दबाव भी कम होगा और उन्हें भी आपका सहयोग अच्छा लगेगा | घर में बड़े बुजुर्ग हों तो उनकी सेवा करिये उनसे बातें करिये जो कि काम के दौरान समय की कमी के कारण आप नहीं कर पा रहे थे | बच्चों को कहानियाँ सुनाइए उनके साथ खेलिए बहुत सारे इनडोर गेम हैं जैसे साँप- सीढ़ी,लूडो ,चेस,कैरम इत्यादि आप सहपरिवार आनंद लें सकते हैं | नए -नए क्रिएटिविटी भी कर सकतें हैं ड्राइंग और क्राफ्ट बच्चों के साथ मिलकर बनाइए और घर को सजाइए| मूवी देखना,अंताक्षरी खेलना,डांस इत्यादि कार्य आप पूरे आनंद से कर सकतें हैं | बच्चों कि छुट्टियाँ हैं ऐसे में वे किताबें छूने से रहे| आप बड़ों का फर्ज बनता है कि रोज १ घंटा बच्चों को पढ़ने के लिए भी कहें उनके कमजोर विषय पर ध्यान दें या उनके अक्षर ख़राब हों तो उसे सुधारने में उनकी मदद करें | बच्चों का उत्साहवर्धन करें | इन सबके साथ ही कुछ समय योग और अच्छी नींद के साथ आप आराम कर सकतें हैं| सफाई का खास ध्यान देकर आप इस लॉकडाउन कि स्थिति में घरवालों के साथ बहुत अच्छा समय व्यतीत कर सकतें हैं | याद रहे आपकी सुरक्षा आपके हाथ मे हैं| घर रहें सुरक्षित रहें |     



रीना मौर्य मुस्कान 
मुंबई  महाराष्ट्र 



Tuesday, December 3, 2019

Aakhir kab ? आखिर कब ?





आखिर कब ?
आखिर क्यों
आखिर कबतक
यूँ बेआबरू
होती रहेंगी बेटीयाँ
आखिर कबतक
हवाला देंगे हम
उनके पहनावे का
उनकी आजादी का
उनकी नासमझी
और समझदारी का
क्यों नहीं ऊँगली उठती
उन वैहशी नज़रों पर
उनके मलिन मस्तिष्क पर
और कहाँ सोया है
हमारा कानून
क्यों नहीं बनाता
कोई मिसाल
की जुल्म के बारे में
सोचकर ही काँप उठे
उन बेदर्दों की आत्मा
और उड़ सके ये बेटीयाँ
बिना किसी डर के
अपनी उड़ान..
आखिर डर के साए
में कबतक जीना होगा
बेटियों को ,
कब देंगे हम उन्हें यह विश्वास
की वो है अब सुरक्षित ?
कब दे पाएँगे हम उन्हें
खुला आसमान ??
आखिर कब ???

Thursday, September 5, 2019

शिक्षक दिवस




डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी एक महान शिक्षक थे हर वर्ष 5 सितंबर अर्थात उनके जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाते है। जीवन को सार्थक बनाने में एवं विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में शिक्षक का अतुलनीय योगदान होता है। पाठ्यक्रम की शिक्षा के साथ ही संस्कार, समझ , कौशल या कह ले की जीवन जीने की हर कला का ज्ञान हमे हमारे शिक्षकों से ही प्राप्त होता है। बच्चों के उज्वल भविष्य का दायित्व शिक्षक पर ही होता है और अपने दायित्व निर्वाह में वे कभी कोई कमी नहीं लाते हैं। 
               जिस तरह एक माता - पिता का सपना होता है की उनके बच्चों का भविष्य उज्वल हो उसी प्रकार हर शिक्षक की भी यही खवाहिश होती है की उनके द्वारा पढाए गए प्रत्येक विद्यार्थी का भविष्य उज्वल हो ।इसलिए हमें अपने गुरु को माता - पिता की भांति ही समझना चाहिए। उनकी डांट - फटकार से हमारा सम्मान घटता नहीं है बल्कि बच्चों को अपने नजरिये को ठीक करने की जरुरत है । जो भी शिक्षक हमें डाँटते है इसका अर्थ यह होता है की वो हमारी फिक्र करते हैं हमें सुधारना चाहते हैं । अगर शिक्षक हमारी गलतियाँ हमें ना बताएँ तो हम क्या सिख लेकर सफल होंगे । क्यूँकी अवगुण और दोष के साथ कोई सफल हो भी नहीं सकता है ।
 गुरु ज्ञान का सागर है 
गुरु गुणों का है भंडार 
गुरु बिन अज्ञानता की नईया को 
कौन लगाए पार 
               बात बिलकुल सही है परंतु आज के परिवेश में हालात कुछ ऐसे बन गए हैं जहाँ पर शिक्षक विद्यार्थियों से कुछ कहते भी हैं तो विद्यार्थी उसे अपना अपमान समझते है । यह गलतफहमी उनके मन पर इस कदर हावी हो जाती है की वे या तो अपने गुरु को ही ठेस पहुँचाते है या स्वयं ही आत्महत्या जैसे कायरतापूर्ण कदम को अंजाम देते हैं । परंतु यह बात क्या सही है जो शिक्षक हमें निःस्वार्थ भाव से पढ़ाते है क्या उन्हें हमारी गलतियों पर डाँटने का भी हक़ नहीं है । 
भविष्य हमारा बनाते शिक्षक
 हमको ज्ञान सिखाते शिक्षक
 शिक्षा , संस्कार , आदर्श, कौशल
 कुशल व्यक्ति बनाते शिक्षक
              इसलिए हमें सदैव अपने शिक्षक का सम्मान करना चाहिए। 5 सितंबर यह दिवस तो खास ही है पर हमें हर दिन को खास बनाना चाहिए । क्यूँकी गुरु को कोई उपहार आकर्षित नहीं करता है बस उन्हें तो सदैव अपने विद्यार्थियों से प्यार और सम्मान की चाहत होती है
रीना मौर्य मुस्कान 
मुंबई महाराष्ट्र

Tuesday, August 13, 2019

प्रगतिपथ अपनाओ तुम



एक माँ के दो बेटे 
आपस में बैर रखते है 
धर्म की चादर ओढ़ के 
एक-दूजे से लड़ते - झगड़ते है 
प्रेम की भाषा को समझो तुम 
हिंसा से कुछ न पाओगे 
जाति-धर्म के नाम पर 
क्या लाशे ही बिछाओगे 
मर गए देखो कितने भाई 
अब कितना लहू बहाओगे 
रोती है माँ बिलख -बिलखकर 
अब कितने चिराग बुझाओगे 
सुनो ऐ भाई , सुनो ऐ बंधू 
यह देश हमारी शान है 
जिसको तुम हानि पहुँचाते
वो मिट्टी बड़ी महान है 
इस मिट्टी की लाज रखो तुम 
क्यों आपस में लड़ते हो 
होगा कुछ ना हासिल तुमको 
बात नहीं तुम समझते हो 
वर्तमान की माँग को समझो 
प्रगतिपथ अपनाओ तुम 
जीवन देखो सुखमय होगा
बस दिल से दिल को मिलाओ तुम 

रीना मौर्य मुस्कान

Tuesday, July 23, 2019

chhata - छाता - बालकविता

     छाता☔️☔️☔️⛈️⛈️


मुझको प्यारा मेरा छाता
ये बारिश से मुझे बचाता

नहीं कभी मै इसको भूलूँ
संग इसको लेकर मै घूमूँ

जब भी आती बरखा रानी
खूब बरसाती हमपर पानी

छाता हमें बचाता है
घर हमको पहुँचाता है
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