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सोमवार, 17 अक्तूबर 2011

Mai hun tujhame kahin naa kahi मैं हूँ तुझमे कहीं-न -कहीं


मैं तेरे मन में हूँ पर जुबान पर नहीं
मैं तेरी बातो में हूँ  , तेरे शब्दो में हूँ 
 पर मैं हूँ तुझमे कहीं-न -कहीं




तू मेरे दिल में है. मेरी बातो मे है 
मेरी रूह में है , मेरे जजबातो में है 
तू मुझमे समाई है इस कदर ,
बस तू हि तू है मैं कहीं नहीं......


26 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही बढि़या शब्‍दों का संगम है

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  2. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच की जी रही है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  3. बहुत ही अच्छा लिखा आपने /बहुत ही भावनामई रचना /बहुत बधाई आपको /मेरे ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद /

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  4. tu mujhame samai hai es kadar
    bas tu hi tu main kahin nahin......
    man ko chhune wali panktiyan

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  5. मैं तेरे मन में हूँ पर जुबान पर नहीं
    मैं तेरी बातो में हूँ , तेरे शब्दो में हूँ
    पर मैं हूँ तुझमे कहीं-न -कहीं
    बहुत ही सुंदर शब्दों में लिखी भाव्नामई,प्रेममई अन्तेर्मन के विस्वास को बताती हुई बेमिसाल रचना /बहुत बधाई आपको /
    मेरे ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद /आशा है आगे भी आपका आशीर्वाद मेरी रचनाओं को मिलता रहेगा /आभार /

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  6. वाह यही तो असल प्रेमतत्व है जिसमे मै तो रहता ही नही सिर्फ़ तू ही तू रह जाता है।

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  7. हृदयस्पर्शी रचना।
    वाह ...बहुत खूब

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  8. तू मेरे दिल में है. मेरी बातो मे है
    मेरी रूह में है , मेरे जजबातो में है
    तू मुझमे समाई है इस कदर ,
    बस तू हि तू है मैं कहीं नहीं......

    बहुत ही सुंदर प्रस्तुति. मज़ा आ गया. धन्यबाद.

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  9. तू मेरे दिल में है. मेरी बातो मे है
    मेरी रूह में है , मेरे जजबातो में है
    तू मुझमे समाई है इस कदर ,
    बस तू हि तू है मैं कहीं नहीं... Bahut khoob.

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  10. सबसे पहले हमारे ब्लॉग 'जज्बात....दिल से दिल तक' पर आपकी टिप्पणी का तहेदिल से शुक्रिया.........आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ...........पहली ही पोस्ट दिल को छू गयी.......कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने..........बहुत खूब...........आज ही आपको फॉलो कर रहा हूँ ताकि आगे भी साथ बना रहे|

    कभी फुर्सत में हमारे ब्लॉग पर भी आयिए- (अरे हाँ भई, सन्डे को भी)

    http://jazbaattheemotions.blogspot.com/
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    एक गुज़ारिश है ...... अगर आपको कोई ब्लॉग पसंद आया हो तो कृपया उसे फॉलो करके उत्साह बढ़ाये|

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  11. तू मेरे दिल में है. मेरी बातो मे है
    मेरी रूह में है , मेरे जजबातो में है
    तू मुझमे समाई है इस कदर ,
    बस तू हि तू है मैं कहीं नहीं......
    kya bat hai reena g aise kaga mere jajbato ko sabda mil gaye ho, kamal ka likha hai , keep it up :- hari attal

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  12. हृदयस्पर्शी रचना।
    वाह .बहुत खूब
    खुदा का नाम लेने में तो हमसे देर हो जाती.
    खुदा के नाम से पहले हम उनका नाम लेते हैं.

    पाया है सदा उनको खुदा के रूप में दिल में
    उनकी बंदगी कर के खुदा को पूज लेते हैं..

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