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रविवार, 1 दिसंबर 2013

Nanhi Chidiya Aur Uske Sawaal नन्हीं चिड़िया और उसके सवाल


----नन्हीं चिड़िया---
जो उड़ना चाहती थी अपने हिस्से कि उड़ान
देखना चाहती थी खुला आसमान ......
नापना चाहती थी अपने हौसलों कि ऊंचाई को
और पूरा करना चाहती थी 
अपने कुछ अरमान .......
पर ऐसा हो ना पाया
निकली छोड़कर जब घोंसला अपना
चील -कौवों के तो हो गए वारे- न्यारे ,,,,
थी इस सत्य से वो अंजान
कि, कुछ नशीली आँखे,,,,
उसकी ऊंचाइयों को देख नहीं पा रहीं है
कुछ कि चोंच उसे नोच खाने 
को बेसब्र , बड़ी आतुरता से
अपने पुरे वेग से उसकी ओर बढ़े जा रहा है .......
देख इनकी दृष्टता मन घबराया 
बचाने अपने दामन को 
झट्ट लौट आई,,,,
अपने उस नन्हें घोंसले में
क्या ये घोंसला ही उसकी मर्यादा बनकर रह गयी है
सवाल???
ह्रदय दहलाने वाला सवाल ??? 
वो पुरुष जो माता के बराबर ही सृजनकर्ता है ,,,,,
जो बरगद कि छाँव कि तरह है ,,,,,
रक्षाबंधन पर अपनी बहन कि 
रक्षा करने का वचन लेता है ,,,,,
फिर क्यूँ वो अपने घरों से बाहर निकलकर 
बन जाता है चील और कौवा,,,,
नोंच खाने को तत्पर - व्याकुल ......
एक नन्हीं चिड़िया
क्यूँ देखती है सभी को शक कि नजर से
सवाल ???
मन को डरानेवाला ???

बुधवार, 27 नवंबर 2013

Shyaam Teri Bansi Ki Dhun श्याम तेरी बंसी की धून




......श्याम तेरी बंसी की धून......
सबको रिझाये 
मनवा बहकाये 
....सुध -बुध भुलाये ....
बस तेरी ओर
खिंचा चला आये
मोहे काहें तड़पाये 
बंसी बजाये
मंद मंद मुस्काये
मोहे छेड़े,,,,,
सताये ....
मुहवाँ बिचकाये
गगरिया फोड़ मोरी 
मोहे ठेंगा दिखाए
......श्याम तेरी बंसी की धून.....
....सुध -बुध भुलाये....
सब रास कहे
सब लीला कहे
मैं जानू तेरी 
साजिशों को सब
अपने प्रेम में
दीवाना काहें 
मुझको बनाये
.....श्याम तेरी बंसी की धून.....
.....सुध -बुध भुलाये....
मन तेरी ओर खिंचा 
चला आये.....

रविवार, 24 नवंबर 2013

Ek Sasuraal Aisa Bhi एक ससुराल ऐसा भी


सुबह सुबह ५ बजे उठकर
माँ रूपी सास से मीठा मीठा 
प्रसाद ग्रहण कर लेने के बाद .......
अब चली है रसोई में 
फीकी सी चाय बनाने ......
सासु माँ कि बोली में इतनी मिठास है की,,,,,
उन्हें मधुमेह हो गया है...
अब बहु उन्हें मीठी सी चाय पीलाकर ,,,
स्वर्ग नहीं पहुँचाना चाहती है.....
पतिदेव को बड़े प्यार से जगा तो दिया है
पर उठते ही पत्नी का चेहरा देखने के बजाय ,,,,
उनकी नजरे अपने दाहिने हाथ की कलाई 
पर चली जाती है,,
सोने के ब्रेसलेट की आस लगाये बैठे थे बेचारे
जो ससुराल वालों से पूरी ना हो पाई...
तभी से मुँह कसा हुआ है उनका.....
कम बोलने लगे हैं बेचारे....
वहीँ लाड़ली ननद रानी 
जो पुरे घर की हैं महारानी...
छोड़- छाड़ के अपना घर बार
लगा बैठी हैं मइके में दरबार.....
देवर जी के ठाठ निराले
अंग्रेजी में ता- था- थैय्या 
भाभी के ना पड़े हैं पाले....
पर ससुर जी तो पुरे देवता सामान...
पर बेचारे के पुरे ना हो पाए थोड़े अरमान...
ज्यादा नहीं बस थोड़ी खातिर करवानी थी..
अपने मेहमानों को भेंट रूप थोड़ी उपहार दिलवानी थी..
पाए ही क्या थे ये जनाब ...
एक हीरो हौंडा बाईक,,,, ५ लाख नकद,,
१२ तोला सोना ...और बस 
घर के छोटे- मोटे सामान...
एक ससुराल ऐसा भी होता हैं..
जहाँ बेटों को पैसों में और
बहुओं को दहेज़ पर तोला जाता हैं...
पूरी कर दो जब इनकी मनमानी  
तो बनेगी बिटिया घर की महारानी...
नहीं तो सुबह-सुबह ५ बजे उठकर..
बिटिया सुनेगी...
सासु माँ की मीठी वाणी...

रविवार, 17 नवंबर 2013

Naari Bhavna नारी भावना...




भावना हवा बनकर उड़ना चाहती थी
पर घास बनकर जमीं से ही सटकर रह गयी .....
भावना पंछियों कि तरह उड़ना चाहती थी
पर पंख पसारे वह मोरनी कि तरह नाचती रह गयी....
भावना करुणा से पिघलती गयी
भावना भावनाओं में बहकती गयी......
भावनाओं के इस अथाह सागर में 
हर किसी ने तृप्ति लगायी
हर किसी ने मलिन तन-मन लिए
भावना के प्रेम सागर में डुबकी लगायी......
किसी कि मलिन नजरे .........
किसी कि मलिन आत्मा ......
सबने भावना को छला 
सबसे भावना कि लहरें टकराई .......
तो क्या भावना मलिन हुई ?????
और हुई तो क्यों???
उसने तो किसी को नहीं छला ,,,,
उसने तो किसी को नहीं ठगा ,,,,
और ग़र समझते हो वो मलिन नहीं ,,,,
तो क्या कभी
उस भावना के गहरे सागर में
डूबकर निकालोगे उसके निश्छल ,
निष्कपट प्यार का वो कीमती मोती ????

नारी भावना. कोमल हृदयवाली.. जिसे ठगनेवालों कि कमी नहीं..कभी प्रेम का ढोंग कर उन्हें झलते है , कभी एसिड से उनकी जिंदगी को झुलसा देते है..तो कभी राह चलते उनके साथ बत्तमीजियां कर उनकी भावना को अक्सर ठेस पहुंचाते है..बस इसी पर मेरी रचना है..
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