कुझ नयी पुरानी यादो के साथ
चलती जा रही हु
कुझ जाने अन्जानो के साथ
मिलती जा रही हु
कुझ नये अह्सासो मे
घुलती जा रही हु
कुझ नयी कल्पना मे
उलझती जा रही हु
कुझ नये स्वप्नलोक मे
डूबती जा रही हु
चंद शब्दो मे कहू तो
मैं खुश्नुमा अह्सासो कि फिजाओ मे
स्वतंत्र पन्झी कि तरह उडती जा रही हु
बस उडती जा रही हु .......
