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सोमवार, 20 जनवरी 2014

tisari duniya तीसरी दूनियाँ ...


कहते है लोग प्रेम में दूनिया भुला देते है पर कुछ लोग अपनी नई दूनियाँ बनाते है जो कहलाती है तीसरी दूनियाँ ...

एक ही ऑफिस में काम करते थे | करीब ६ महीने कि जान पहचान . ५ महीनों कि दोस्ती और बातचीत,और घंटो आँखों का आँखों से मिलना,जिसमे रोज घंटो कि लड़ाई..दोनों ही बातूनी झगड़ालू और शर्तो के उस्ताद ,,बात बात पर शर्त लगाना...

बातचीत भी कुछ ऐसी,, ज्यादा बातें ना बनाओ अगर मैंने बोलना शुरू किया तो तुम्हारी आँखे और कान खुले के खुले रह जायेंगे..
      अच्छा तो तुम्हें क्या लगता है तुम बोलोगी तो मैं चुप रहूँगा ..
 हाँ हाँ ।  तुम तो जरुर बोलोगे ,,बोले बिना तुम्हें चैन कहाँ..
अमन ---- प्रिया तुम ही हमेशा लड़ती रहती हो.गुस्सा तो जैसे तुम्हारी नाक पर बैठा रहता है कभी प्यार से शांति से भी दो शब्द बोल दिया करो ..
प्रिया--- प्यार के शब्द वो भी तुमसे .....
हम्म ...

अमन और प्रिया लगभग एक ही स्वभाव के थे..पर दोनों में ऐसे ही मस्ती- मस्ती में झगड़े होते रहते है ..प्रिया अक्सर अमन को गुस्से में झगड़ालू और" कमीने हो" कहती...
अमन भी उसे चिढ़ाने के लिए कह देता -- तुम भी कम नहीं हो तुम भी तो झगड़ा करती हो,, तो बन जाओ न इस कमीने कि कमिनी,, जोड़ी अच्छी रहेगी ..

दोनों अधिकतर साथ में ही रहते ,भले ही एक-दूसरे से लड़ते -झगड़ते पर एक -दूसरे को अच्छे से समझते भी थे.. जुबान पर गालियाँ पर मन में एक-दूसरे के लिए ढ़ेर सारा प्यार और सम्मान था..
पर किस्मत का खेल .. कानपूर से अमन के माँ कि चिट्ठी आई कि अमन के पिता कि तबियत ठीक नहीं है.अमन को तुरंत जाना था , वहाँ जाकर पता चला कि अमन के पिता अब कुछ ही दिनों के मेहमान है . अमन वहीँ रहकर अपने पिता कि सेवा करने लगा.अमन और प्रिया अक्सर फोन पर बात करते थे. इन दूरियों ने उनके बीच के प्रेम को और गहरा कर दिया. अमन और प्रिया ने एक-दूसरे से अपने प्रेम का इजहार कर दिया और शादी करने का फैसला लिया.इसी बीच अमन के पिता कि तबियत और बिगड़ती जा रही थी अमन के पिता ने उसे बुलाकर अपनी अंतिम, इक्छा बताई.उनकी अंतिम इक्छा थी कि उनके रहते ही अमन अपना गृहस्थ जीवन बसाकर उनके कारोबार को आगे बढ़ाए.पिता को ऐसी स्थिति में देख कर अमन उन्हें मना ना कर पाया. कुछ दिनों के बाद अमन के पिता ने अपनी संपत्ति अमन के नाम कर दी और अपने दोस्त के बेटी से उसकी शादी करवा दी...
        प्रिया को जब पता चला तो वो काफी उदास हो गई.कुछ महीनों के बाद प्रिया कि भी शादी हो गई.पर दोनों एक-दूसरे को भूल नहीं पाये थे .दोनों ने मिलने का फैसला लिया.दोनों शिव जी के मंदिर में मिले ,मिलते ही एक-दूसरे को गले लगाकर बहुत रोए.ह्रदय कि सारी वेदना जैसे अश्रु बन कर आँखों से झर - झर बहे जा रही थी.
दोनों के संस्कार और अपने माता - पिता के प्रति उनका प्यार उन्हें अपनी अलग दुनिया बसाने कि इजाजत भी तो नहीं देते..
ऐसे में अमन ने एक उपाय निकाला,,वो प्रिया से कहने लगा -- प्रिया एक दुनिया तुम्हारी है तुम्हारे पति के साथ दूसरी दुनिया मेरी है मेरी पत्नी के साथ तो क्यूँ ना हम अपनी तीसरी दुनिया बसाए. जिसमे हम दोनों साथ हो..
वो कैसे अमन--- यहीं इसी जगह पर हम हमारे प्यार का एक पौधा लगाएंगे जो बढ़ेगा और इसी के साथ हमारा प्यार भी बढ़ेगा. मैं हमेशा यहाँ आने कि कोशिश करूँगा .
प्रिया -- "नहीं अमन "--- हमारी तीसरी दुनिया बने इससे पहले मैं तुमसे एक वादा चाहती हूँ
बोलो प्रिया---- आजतक जो रिश्ते तुमसे जुड़े है और आनेवाले समय में और भी रिश्ते जुड़ते जायेंगे उन्हें तुम्हें पूरी ईमानदारी के साथ निभाना है ,,जरुर प्रिया --पर यही वादा मैं तुमसे भी चाहता हूँ....." वादा रहा"....
      तो चलो शुरुवात करतें है तीसरी दुनिया की--- तीसरी दुनियाँ की नींव पड़ गई.जब भी समय मिलता दोनों अक्सर यहाँ आते औए अपने प्रेम की ऊँचाई और सच्चाई को देखते..
    दोनों ने खूब मेहनत की और आसपास की जगह को भी पार्टनर बनकर खरीद लिया . अपनी - अपनी दुनियाँ में पूरी ईमानदारी से जीते हुए अपनी तीसरी दुनिया को साकार किया और वहाँ एक स्कूल - कॉलेज बनाया...

अमन और प्रिया अब भी मिलते हैं, लड़ते हैं, झगड़ते हैं | पर अब सब खुश हैं..
पहनी दुनियाँ , दूसरी दुनियाँ और तीसरी दुनियाँ के लोग भी… 
     
बस ऐसे ही मन में ख्याल आया और ये कहानी बन गई...
तीसरी दूनियाँ 
एक प्रेम कहानी...
कैसी है जरुर बताइये..

रविवार, 5 जनवरी 2014

mamta ki chhanv ममता कि छाँव



माँ रहती है तो सबकुछ 
कितना आसान होता है
जैसे कोई गम ...
कोई दुःख ...
कोई कठिनाई ...
बस छूकर निकल गई हो जैसे
हर तकलीफ हर गम से माँ उबारती है
बड़े ही सलीके और प्यार से समझाती है
हिम्मत और हौंसला है माँ
माँ तुझसे ही है मेरा जहाँ .....


माँ एक शब्द 
कितने अहसास
कितना प्रेम , 
कितने अपनत्व,
 कितने जज्बात
भर आँचल ममता ,
कितनी ही चिंता,,
हरपल आँखों में 
प्यारा सा सपना सजाती
अपने लाड़ले - लाड़लियों के लिए 
कितने ही त्याग देती 
एक चलती- फिरती मुस्कुराती देवी है माँ...
माँ तुझसे ही है मेरा जहाँ .....

शुक्रवार, 27 दिसंबर 2013

wakt वक्त


काश इस वक्त को भी
हमसे प्यार हो जाए
जब आप दूर रहो
तो ये वक्त तेजी से गुजरता जाए
और जब आप पास आओ तो
ये वक्त चुपके से ठहर जाए
काश इस वक्त को भी हमारे
 प्यार  पर प्यार आ जाए

घड़ी के तीनों काँटों कि 
आवाज को महसूस किया है
हर लम्हें में तुम्हें याद किया है
वक्त कि हर आहट याद तुम्हारी 
दे जाती है 
कभी तुमसे मीलने कि खुशी

कभी बिछड़ने का गम साथ ले आती है  


कुछ ख्वाहिशे वक्त कि मोहताज होती है
शायद वो ख्वाहिशे पूरी भी हो जाये कभी..
पर वो बिता हुआ वक्त फिर लौट कर नहीं आ सकता..
जिस वक्त में इन ख्वाहिशो को पूरा होना था..
अजीब दास्ताँ है ये..


गुरुवार, 19 दिसंबर 2013

Tera Roop Mera Rang तेरा रूप मेरा रंग



तू कला मै कविता
तू सोच मै शब्द 
तू कागज मै कलम .......
चलो बनाएँ एक 
ऐसी बोलती तस्वीर ,,,,,
जिसमे रूप तुम्हारा हो
और रंग मेरा ......
जिसमे जिस्म तुम्हारा हो 
और सांसे मेरी .....
जिसमे दिल तुम्हारा हो
और धड़कने मेरी ....
जिसमे आँखे तुम्हारी हो
और सपने मेरे ....
जिसमे होंठ तुम्हारे हो
और मुस्कुराहट मेरी ....
जिसमे भावना तुम्हारी हो और
अहसास मेरे .....
आओ गढ़े एक ऐसा चित्र 
जिसमे तेरा रूप और मेरा रंग
मिलकर बन जाए प्रेम तरंग .....

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