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मंगलवार, 26 मई 2020

bhukh भूख


बहुत छोटा शब्द है " भूख " पर भूख की दौड़ बहुत लंबी है रोटी तक पहुँचने के लिए रास्ते में अनेक रोड़े हैं, अशिक्षा अज्ञानता भोलापन गरीबी मजबूरी इन सबके साथ ही हो जाते हैं ठगी का शिकार साहब से धोखेबाजों से लालचियों से फिर जो मिलता है, खाते हैं, बचाते हैं l फिर आ जाता है हाथ आजमाने खराब किस्मत l सूखा बाढ़ आपातकाल अफवाह सब कुछ ख़त्म l बस बचती है मारी हालत की दो रोटी l सच, भूख की दौड़ बहुत लंबी है रोटी तक पहुँचने के लिए l रीना मौर्या मुस्कान मुंबई, महाराष्ट्र

मंगलवार, 28 अप्रैल 2020

ऐसी होती है माँ


जब भी कुछ परेशानी होती
या कोई कठिनाई आए
मुझे चिंता मुक्त करने के खातिर
कभी माँ, कभी बहन
कभी सखी बन जाती है
माँ तू कितने किरदार निभाती है l

कभी खेलती, बातें करती
आँचल में छुपाती है
सीने से लगाकर मुझको
सारे दुःख बिसराती है
माँ तू कितने किरदार निभाती है l

बच्चों की शिक्षा को तुमने
सर्वप्रथम माना हरदम
मेरे लिए तो माँ तू ही
देवी सरस्वती बन जाती है
माँ तू कितने किरदार निभाती है l

कभी गुरु बन ज्ञान देती
ऊँच-नीच का पाठ पढ़ाती
संस्कारो की देती शिक्षा
जीवन की कला सिखाती है

माँ तू कितने किरदार निभाती है l

तुम्हारी महिमा के क्या कहने
अपने सपने त्यागकर
हमपर सबकुछ वार कर
तू हमारा भविष्य बनाती है
माँ तू कितने किरदार निभाती है।



रीना मौर्या मुस्कान
मुंबई,महाराष्ट्र 

रविवार, 19 अप्रैल 2020

कोरोना को मात




कर्फ्यू का करीए पालन, हृदय में लिजिए ठान 
घर में रहिए अपनों संग, बची रहेगी जान 

कोरोना के रोग का, बढ़ रहा है प्रभाव 
नासमझी में कुछ लोग, सबको दे गए घाव 

कोरोना के जाल ने, सर्वस्व लिया है घेर 
संभल जाओ ऐ दोस्तों,वरना होगी देर 

कोरोना के रोग ने, खूब किया आघात 
घर में रहकर हम सभी, इसको देंगे मात 

कोरोना के रोग ने, हर लिए कितने प्राण 
संभल जाओ ऐ दोस्तों, रख लो अपना ध्यान

यहाँ - वहाँ घूमे नहीं, घर है सुरक्षित स्थान 
शांति से घर में बैठो,  लो बात आप मान

रीना मौर्य मुस्कान
मुंबई  महाराष्ट्र

शुक्रवार, 10 अप्रैल 2020

सावधानी ही बचाव है


अब समय आ गया है
हमें सबका साथ निभाना है
कोरोना से डरना नहीं , बस
थोड़ी सावधानी दिखाना है
यहाँ - वहाँ घूमे नहीं
सुरक्षा का ख्याल रखना है
कुछ समय का ये संकट है
बस , थोड़ा सब्र दिखाना है
रखें अपना ख्याल आप
अपने अपनों को भी समझाना है
हो कोई भी समस्या आपको
तुरंत डॉक्टर के पास जाना है
हाथ धोये, मुँह धोये
स्वछता का रखें ख्याल
जब भी जाएँ बाहर आप
मुँह पर मास्क लगाना है
सावधानी और सजगता ही
हमें इस कहर से बचाएगी
जनता कर्फ्यू का देंगे साथ
आज सबको एकजुट हो जाना है
करो धन्यवाद उनका भी
जो हमारी सेवा में तत्पर हैं
एकसाथ मिलकर हमें
इस महामारी को देश से मिटाना है


रीना मौर्य मुस्कान
मुंबई महाराष्ट्र

बुधवार, 1 अप्रैल 2020

घर बैठे बोर ना हो क्रिएटीव बनें |




माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा अगले २१ दिनों तक लॉकडाउन का ऐलान कर दिया गया है जो कि कोरोना के संक्रमण की चेन को रोकने के लिए अति आवश्यक है |
     ऐसी स्थिति में सभी लोगों से नम्र  निवेदन है कि वे अपने - अपने घरों में रहकर अपना, अपने अपनों का तथा देश कि सुरक्षा में सहभागी हो | पर बहुत से लोग इतने अपील के बाद भी घर से निकलना बंद नहीं किये हैं|बोर होने का बहाना देकर यहाँ -वहाँ टहल रहें हैं | इसलिए आप घर बैठे बोर ना हो 
 क्रिएटीव बनें | अपने परिवार वालों को समय दें | अब बात आती हैं कि करें क्या ? तो घर के सभी सदस्य एक-दूसरे के कार्य में सहयोग देकर घर के कार्य से जल्दी निजात पा सकते हैं फिर सभी मिलकर आपसी बातचीत कर सकतें हैं | रसोईघर में कोई नया - नया पकवान बनाकर पूरा परिवार आनंद से खा सकता है| ऐसी स्थिति में घर कि महिला पर रसोईघर का दबाव भी कम होगा और उन्हें भी आपका सहयोग अच्छा लगेगा | घर में बड़े बुजुर्ग हों तो उनकी सेवा करिये उनसे बातें करिये जो कि काम के दौरान समय की कमी के कारण आप नहीं कर पा रहे थे | बच्चों को कहानियाँ सुनाइए उनके साथ खेलिए बहुत सारे इनडोर गेम हैं जैसे साँप- सीढ़ी,लूडो ,चेस,कैरम इत्यादि आप सहपरिवार आनंद लें सकते हैं | नए -नए क्रिएटिविटी भी कर सकतें हैं ड्राइंग और क्राफ्ट बच्चों के साथ मिलकर बनाइए और घर को सजाइए| मूवी देखना,अंताक्षरी खेलना,डांस इत्यादि कार्य आप पूरे आनंद से कर सकतें हैं | बच्चों कि छुट्टियाँ हैं ऐसे में वे किताबें छूने से रहे| आप बड़ों का फर्ज बनता है कि रोज १ घंटा बच्चों को पढ़ने के लिए भी कहें उनके कमजोर विषय पर ध्यान दें या उनके अक्षर ख़राब हों तो उसे सुधारने में उनकी मदद करें | बच्चों का उत्साहवर्धन करें | इन सबके साथ ही कुछ समय योग और अच्छी नींद के साथ आप आराम कर सकतें हैं| सफाई का खास ध्यान देकर आप इस लॉकडाउन कि स्थिति में घरवालों के साथ बहुत अच्छा समय व्यतीत कर सकतें हैं | याद रहे आपकी सुरक्षा आपके हाथ मे हैं| घर रहें सुरक्षित रहें |     



रीना मौर्य मुस्कान 
मुंबई  महाराष्ट्र 



मंगलवार, 3 दिसंबर 2019

Aakhir kab ? आखिर कब ?





आखिर कब ?
आखिर क्यों
आखिर कबतक
यूँ बेआबरू
होती रहेंगी बेटीयाँ
आखिर कबतक
हवाला देंगे हम
उनके पहनावे का
उनकी आजादी का
उनकी नासमझी
और समझदारी का
क्यों नहीं ऊँगली उठती
उन वैहशी नज़रों पर
उनके मलिन मस्तिष्क पर
और कहाँ सोया है
हमारा कानून
क्यों नहीं बनाता
कोई मिसाल
की जुल्म के बारे में
सोचकर ही काँप उठे
उन बेदर्दों की आत्मा
और उड़ सके ये बेटीयाँ
बिना किसी डर के
अपनी उड़ान..
आखिर डर के साए
में कबतक जीना होगा
बेटियों को ,
कब देंगे हम उन्हें यह विश्वास
की वो है अब सुरक्षित ?
कब दे पाएँगे हम उन्हें
खुला आसमान ??
आखिर कब ???

गुरुवार, 5 सितंबर 2019

शिक्षक दिवस




डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी एक महान शिक्षक थे हर वर्ष 5 सितंबर अर्थात उनके जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाते है। जीवन को सार्थक बनाने में एवं विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में शिक्षक का अतुलनीय योगदान होता है। पाठ्यक्रम की शिक्षा के साथ ही संस्कार, समझ , कौशल या कह ले की जीवन जीने की हर कला का ज्ञान हमे हमारे शिक्षकों से ही प्राप्त होता है। बच्चों के उज्वल भविष्य का दायित्व शिक्षक पर ही होता है और अपने दायित्व निर्वाह में वे कभी कोई कमी नहीं लाते हैं। 
               जिस तरह एक माता - पिता का सपना होता है की उनके बच्चों का भविष्य उज्वल हो उसी प्रकार हर शिक्षक की भी यही खवाहिश होती है की उनके द्वारा पढाए गए प्रत्येक विद्यार्थी का भविष्य उज्वल हो ।इसलिए हमें अपने गुरु को माता - पिता की भांति ही समझना चाहिए। उनकी डांट - फटकार से हमारा सम्मान घटता नहीं है बल्कि बच्चों को अपने नजरिये को ठीक करने की जरुरत है । जो भी शिक्षक हमें डाँटते है इसका अर्थ यह होता है की वो हमारी फिक्र करते हैं हमें सुधारना चाहते हैं । अगर शिक्षक हमारी गलतियाँ हमें ना बताएँ तो हम क्या सिख लेकर सफल होंगे । क्यूँकी अवगुण और दोष के साथ कोई सफल हो भी नहीं सकता है ।
 गुरु ज्ञान का सागर है 
गुरु गुणों का है भंडार 
गुरु बिन अज्ञानता की नईया को 
कौन लगाए पार 
               बात बिलकुल सही है परंतु आज के परिवेश में हालात कुछ ऐसे बन गए हैं जहाँ पर शिक्षक विद्यार्थियों से कुछ कहते भी हैं तो विद्यार्थी उसे अपना अपमान समझते है । यह गलतफहमी उनके मन पर इस कदर हावी हो जाती है की वे या तो अपने गुरु को ही ठेस पहुँचाते है या स्वयं ही आत्महत्या जैसे कायरतापूर्ण कदम को अंजाम देते हैं । परंतु यह बात क्या सही है जो शिक्षक हमें निःस्वार्थ भाव से पढ़ाते है क्या उन्हें हमारी गलतियों पर डाँटने का भी हक़ नहीं है । 
भविष्य हमारा बनाते शिक्षक
 हमको ज्ञान सिखाते शिक्षक
 शिक्षा , संस्कार , आदर्श, कौशल
 कुशल व्यक्ति बनाते शिक्षक
              इसलिए हमें सदैव अपने शिक्षक का सम्मान करना चाहिए। 5 सितंबर यह दिवस तो खास ही है पर हमें हर दिन को खास बनाना चाहिए । क्यूँकी गुरु को कोई उपहार आकर्षित नहीं करता है बस उन्हें तो सदैव अपने विद्यार्थियों से प्यार और सम्मान की चाहत होती है
रीना मौर्य मुस्कान 
मुंबई महाराष्ट्र

मंगलवार, 13 अगस्त 2019

प्रगतिपथ अपनाओ तुम



एक माँ के दो बेटे 
आपस में बैर रखते है 
धर्म की चादर ओढ़ के 
एक-दूजे से लड़ते - झगड़ते है 
प्रेम की भाषा को समझो तुम 
हिंसा से कुछ न पाओगे 
जाति-धर्म के नाम पर 
क्या लाशे ही बिछाओगे 
मर गए देखो कितने भाई 
अब कितना लहू बहाओगे 
रोती है माँ बिलख -बिलखकर 
अब कितने चिराग बुझाओगे 
सुनो ऐ भाई , सुनो ऐ बंधू 
यह देश हमारी शान है 
जिसको तुम हानि पहुँचाते
वो मिट्टी बड़ी महान है 
इस मिट्टी की लाज रखो तुम 
क्यों आपस में लड़ते हो 
होगा कुछ ना हासिल तुमको 
बात नहीं तुम समझते हो 
वर्तमान की माँग को समझो 
प्रगतिपथ अपनाओ तुम 
जीवन देखो सुखमय होगा
बस दिल से दिल को मिलाओ तुम 

रीना मौर्य मुस्कान

मंगलवार, 23 जुलाई 2019

chhata - छाता - बालकविता

     छाता☔️☔️☔️⛈️⛈️


मुझको प्यारा मेरा छाता
ये बारिश से मुझे बचाता

नहीं कभी मै इसको भूलूँ
संग इसको लेकर मै घूमूँ

जब भी आती बरखा रानी
खूब बरसाती हमपर पानी

छाता हमें बचाता है
घर हमको पहुँचाता है

शनिवार, 6 अप्रैल 2019

chhoti -chhoti baten छोटी छोटी बातें



आजकल बहुत कमियाँ 
निकालने लगे हो तुम
सीधे -सीधे कह दो ना की
अब तुम्हें हमारी जरुरत नहीं 
*************************************
गम बहुत है जहाँ में 
पर आँसूओं से हासिल क्या 
जिंदगी को जीने के लिए 
मुस्कान की जरुरत है 
**************************************
नशा सिर्फ जाम से ही नहीं होता 
" घमंड " और " अहंकार " भी 
बहुत नशीले होते हैं 
***************************************

कुछ होने के लिए 
वजह की जरुरत नहीं होती
कभी बेवजह भी
बहुत कुछ हो जाता है 
जिससे आवाज आई 
सिर्फ वही नहीं टुटा है 
बिना आवाज किये भी 
बहुत कुछ टूट जाता है
**************************************
तुम दुआ बनकर 
मेरी जिंदगी में आना
और मै मुस्कान बनकर 
तुम्हारे होंठो पर बस जाऊँ
*****************************************
बातों की मार 
घमंड 
शक 
और जलन 
कर देते है 
रिश्तों का
 दहन
*********************************
अकेले में तो 
दुश्मन भी 
हाँ में हाँ 
मिलाते हैं 
तुम अगर 
दोस्त हो तो 
महफ़िल में आओ 
*******************************
हाल-ए- मिजाज कुछ 
बदला -बदला सा है उनका 
जुबान कुछ और कह रही है 
मुस्कान कुछ और 
*********************************
ठोकर लगी है शीशे को 
इसलिए तो टुटा है
और लगी है बड़ी जोर से 
इसलिए तो इतना बिखरा है 
*****************************


रविवार, 31 मार्च 2019

jogan जोगन



जोगन का है रूप धरा 
जोगन तेरी कहलाऊँगी
और नहीं कुछ चाह है प्रियतम
भजन तेरे ही गाऊँगी
मन के मंदिर में मै अपने 
मूरत तेरी सजाऊँगी
मै तेरी दीवानी साँवरे
तुझे नैनन में बसाऊँगी
तुम मेरे भगवन हो कान्हा 
मै हूँ तेरी जोगनियाँ
दर्शन दे दो हे प्रभुवर 
मै तृप्त मन हो जाऊँगी
दर्शन को तेरे नैना तरसे 
तरस- तरस के नैना बरसे
मन भी अब विचलित है डर से
और अधिक ना करो विलंब
मै मीरा दीवानी तेरी
जोड़ी तुझसे प्रीत की डोरी 
अब और नहीं कुछ चाह है मेरी 
मिल जाये जो तेरा दर्शन 
8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8-8

मंगलवार, 24 अप्रैल 2018

Aakhir kab ? आखिर कब ?



आखिर क्यों
आखिर कबतक
यूँ बेआबरू
होती रहेंगी बेटीयाँ ?
कभी उनके कपड़ों पर
कभी उनकी आज़ादी पर 
सवाल उठते थे ?
पर मासूम बच्चियाँ
दुधमुही बच्चियाँ अब उनपर 
क्या और किस 
बात का दोषारोपण होगा ?
उनपर किस बात की 
उँगली उठेगी अब ?
क्यों नहीं ऊँगली उठती
उन वैहशी नज़रों पर
उनकी कोढ़ी आत्मा पर
उनके मलिन मस्तिष्क पर
और कहाँ सोया है 
हमारा कानून
क्यों नहीं बनाता 
कोई मिसाल
की जुल्म के बारे में
सोचकर ही काँप उठे 
उन बेदर्दों की आत्मा
और उड़ सके ये बेटीयाँ
बिना किसी डर के
अपनी उड़ान.. 
आखिर डर के साए
में कबतक जीना होगा ?
बेटियों को और उनके
परिवारजनों को 
फिर कैसे कोई 
बेटी बचाएँ और उन्हें पढ़ायेगा ?
कब देंगे हम बेटियों को यह विश्वास 
की वो है अब सुरक्षित ?
कब दे पाएँगे हम उन्हें 
खुला आसमान ??
आखिर कब ???



रीना मौर्य मुस्कान 

गुरुवार, 15 मार्च 2018

Astitv अस्तित्व





मेरा अस्तित्व मेरे साथ है 
वो किसी के नाम का मोहताज नहीं 
पर हाँ 
जब मेरे नाम के साथ 
मेरे पिता का नाम होता है 
मुझे ख़ुशी होती है
उनका मेरे साथ होना
उनका अहसास 
उनका आभास ....
और जब नाम के साथ
जुड़ता है पति का नाम 
तब भी नहीं खोता 
मेरा अस्तित्व 
ये तो बंधन है प्यार का 
मेरा स्त्री होना ही
मेरा अस्तित्व है 
और इस अस्तित्व से 
मैंने रचा है कई रिश्ता 
मेरे नाम के साथ किसी का नाम
या किसी के नाम के साथ मेरा नाम
ये कोई वजह नहीं 
अस्तित्व के होने न होने में
या अस्तित्व के खोने में
ये नाम तो हमें रिश्ते देते है
पर अस्तित्व की असली पहचान 
हमारा कर्म है 
हमारा लक्ष्य है
और एक स्त्री होना ही 
अपने आप में पूर्ण 
अस्तित्व है... 

रीना मौर्य मुस्कान 
मुंबई महाराष्ट्र  


गुरुवार, 1 मार्च 2018

Rangbhari holi aai रंगभरी होली आई



रंग है उमंग है 
चारो ओर हुड़दंग है
मस्ती है प्यार है
रंगों की भरमार है
नीले, पिले, लाल, गुलाबी 
रंग सभी को भाते हैं
होली के त्यौहार मे
सबको गले लगाते हैं
गुजिया कचौरी की 
मीठी खुशबू
सबका मन ललचाते हैं 
भूल के सारे गिले और शिकवे 
हम हाथ से हाथ मिलाते हैं
प्रेम से होली मनाते हैं जी 
प्रेम से होली मनाते हैं |

8888888888888888888888888888888888888888888
888888888888888888888888888888888888888

मंगलवार, 20 फ़रवरी 2018

kaise ho sajan mere कैसे हो साजन मेरे






कैसे हो साजन मेरे 
ना कोई संदेशा आया है
झूठी हँसी से चेहरा सजा है
मन का पुष्प मुरझाया है 
आँखे भी ना साथ निभाए 
रह-रह आँसू झलक आया है 
पिया मिलन को तरसे जियरा 
ना कोई संदेशा आया है
बाट जोहती दिन और रैना 
थक कर हार गए मोरे नैना
थोड़ी सुध -बुध यहाँ की भी ले लो
माँ-बाबूजी का हालचाल ही पूछ लो
ऐसे भी क्या व्यस्त हो रहते 
तुम बिन हम क्या कुछ है सहते
बिन पिया के जीना है कितना मुश्किल
पड़ोसिन चुभाती है हर वक्त तानों के कील
घूँट-घूँट तानों के पी रही हूँ
माँ-बाबूजी और बच्चों के लिए जी रही हूँ
चलो छोडो सबकुछ अब
लौट यहाँ तुमको आना है 
बहुत हो गई ये रुसवाई 
आ जाओ एक बार पिया जी

अब दूर न तुमको जाना है  



रविवार, 15 जनवरी 2017

libas लिबास


जब दुःख का जहर
उफनता है
मन छोटा हो जाता है
दिल रोता है
जब सोच- सोचकर उसकी बातें
दुखती है दिमाग की
नस – नस
पर ना देखे कोई और
मेरे इस दर्द की सच्चाई को
तो लो एक बार फिर
ओढ़ लिया है मैंने
मुस्कुराहटों का लिबास
फिर से तुम्हारा सच छिप गया
और मेरा झूठ निखर गया
मेरी मुस्कुराहटों के पीछे

शुक्रवार, 16 दिसंबर 2016

ful gulab ka फूल गुलाब का



महक उठता था मेरा अंग
जब तू था मेरे संग
वो गुलाबी गुलाब के फूल
चुभे थे तुम्हारे हाँथों में 
उसके शूल
सुर्ख लाल रंग लहू से अपने
भर दी थी तुमने माँग मेरी
और चूम लिया था मैंने
अपने लाल होंठों से 
तुम्हारा माथा
तिलक के पर्याय मे
और इस तरह कर लिया था
हमने ब्याह 
गुलाब को साक्षी मानकर
और आज वही गुलाब
अपने फीके पड़े रंगों में
सकुचाया - सा दबा पड़ा है
किताबों के बिच
झर जाने को बेताब
क्यूँकी वह नहीं बन सकता
निशानी हमारे बिछोह की
उसे नामंजूर है 
हमारा एक - दूजे से बिछड़ना
और तुम्हें ?? 

सोमवार, 5 दिसंबर 2016

Bhavishy भविष्य



रात की चादर में 
लिपटा है
चाँद - तारों से बातें 
करता है 
सितारों से
सीखता है गिनतियाँ
बचाता है खुद को
तेज हवाओं से 
ढूंढता है गर्माहट 
अपने हाथों की 
रगड़ में
मुँह से निकलते 
भाँप में
घुटनो को पेट तक
सिकोड़ लेता है
फटे चीथड़ों में 
लिपटा हुआ
मेरे देश का भविष्य 
या कह लो
अँधेरा भविष्य
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